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Saturday, 10 October 2020

जिन्होंने भारत को सफलता की शिखरों तक पहुंचाया

 आज फिर ज़रूरत है लाल बहादुर शास्त्री और अब्दुल कलाम की 


लुधिययाना
: 9 अक्टूबर 2020: (डा.भारत//FIB media)::
भारत भूमि कभी भी वीरों से खाली नहीं रही है, समय समय पर प्रकृति इश्वरी शक्तियों ने एक से एक धुरन्दर वीर पैदा किया है। इन्ही में हम आज़ाद भारत में कुछ महान सख्शियतों का नाम लेना चाहेंगे, वैसे तो पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी जी जैसे कर्मवीरों की बाद के लेख में लिखना चाहेंगे, परन्तु इतनी वक्त हम मिसाइल मैन के नाम से विश्व विख्यात जिनके प्रयाश से जहाँ हम मंगल ग्रह तक पहुँच सके वहीँ सामरिक शक्ति से रूस अमेरिका के बराबर तक पहुंचा दिया वह रहे हैं पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे . अब्दुल कलाम जी। दुसरे  है जय जवान, जय किसान के नाम से विश्व विख्यात जिन्होंने अपने कर्तव्य अपनी विचारधारा अपने कर्मों से सेना के जवानों को नया जोश नई शक्ति वह उमंग भरा की 1965 के भारत पाक युद्ध में अमेरिका का सबसे शक्तिशाली अजेय माना जाने वाला  पैटन टैंक की धज्जिया उड़ाकर टैंकों का  कब्रिस्तान बना दिया वे महान हस्ती रहे हैं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री, जिनकी देश के प्रति देशभक्ति की आनेवाले पीढ़ी जनरेशन शदियों तक सैलूटे करती रहेगी।

       आज के मौजूदा समय में जिस तरह से  देश के हालत पैदा हो चुके हैं की हम थोड़े से शब्दों में व्याख्या नहीं कर सकते। प्रत्यक्ष देखा जा सकता है की आज शिक्षक दुखी, आज सरकारी कर्मचारी दुखी, आज  किसान दुखी आज व्यापारी दुखी,  आज मजदूर दुखी, आज छोटे मोटे काम धंधे करने वाले दुखी , कौन है जो सुख चैन से समय व्यतीत जिनके दिमांग में कट्टरता भर गई हो चाप्लूस जैसे लोग ही सुखी होने का दिखावा करके के की देखो हम  कैसा जीवन जी रहे हैं ? सिर्फ दिखावे के लिए। आज  ऊंच नीच के भेद भाव से कहीं खुलेआम गरीब तबकों  पीटा  जा रहा है। 
जातिवाद,सम्प्रदायवाद,नफरत्वाद,पापाचार, अत्याचार, लूटखसोट,  हत्या बलात्कार, छोटी बच्चियों से बलात्कार, शरेआम गुंडई, हुड़दंग, जैसे अनेकानेक अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं, देश के अधिकांश प्रदेशों के  हर तरफ हर कोई आम जनता डर-भय-शंका, से पीड़ित होती नजर आ रही है? आखिर कौन है इन सब का जिम्मेदार शासन नाम की कोई चीज रह ही नहीं गई , हर तरफ मनमानी, न्याय के लिए भटकते लोग? आगे कुछ सूचनाएं ऐसी हैं कि अगर शासन प्रशासन, और जनता तीनो को मिलकर राष्ट्र हित में कोई न कोई सार्थक कदम पर एक जुट एक राय होकर साथ चलना पड़ेगा, सबसे अति महत्वपूर्ण जो है की इतनी वक्त सभी राजनितिक पार्टियों दलों को देश की सुरक्षा देश की एकता अखंडता के लिए एक राय एक मत से पहले देश की इन आनेवाले खतरों के प्रति सतर्क होकर देश को सभालना जरुरी ही नहीं अति से अति जरुरी हो गया है, बाद में अपने राजनितिक ड्रामा करते राहों वार्ना वक्त और इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा।     
फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो को कुछ ऐसी सूचनाएं सुनने को  मिली हैं  की? चर्चा तो यहाँ तक है कि  देश के कुछ  तथाकथित राजनितिक देश में दंगा कराकर फौजी शासन लागु कराना चाहते है तांकि अब तक बेदाग़ भारतीय सेना पर भी दाग लग जाये देश ईरान इराक ,अफगानिस्तान से भी गया गुजरा हो जाये? इस लिए हमें  देश के प्रति समर्पित महामहिम डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रपति और कर्मवीर स्वर्गीय प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जैसे महान हस्तियों की जरुरत है क्यूंकि पिछले दिनों ही सरकार के मंत्री लोगों ने राज्य सभा में जानकारी दी  के १२ राज्यों में विश्व के खूंखार आतंकी संगठन आई एस आई एस अपने अड्डे कायम कर चुका है। इसलिए न तो हम सुरक्षित  ही देश सुरक्षित है।  याद रखें यह भी एक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता जब जब मानव असहाय हुआ है तब तब कोई नयी शक्ति ईश्वर ने पैदा की है।  
       कहते हैं कि परिवर्तन ही प्राकृति का नियम है, जब जब इस धरा पर हद से ज्यादा स्वार्थी , फरेबी, झूठ पापाचार, अत्याचार , हत्या बलात्कार जैसे जघन्य अपराध बढ़ने लगता है, और शासन मनमानियां करने लगती हैं  तब तब जीव मानव की रक्षा के लिए प्रकृति ईश्वरीय शक्तियों को किसी न किसी रूप में अपनी ताकत  दिखानी पड़ती है।  

Wednesday, 16 August 2017

देश के दुश्मनों पर पैनी नज़र है FIB की

हर्षोल्लास से मनाया स्वतंत्रता दिवस 
सारी उम्र इसी जनून में गुज़ार दी है डाक्टर भारत ने 
सीजेएम डा गुरप्रीत कौर जी को सुस्वागतम कहते हुए डा. भारत 
लुधियाना: 16 अगस्त 2017: (FIB मीडिया टीम):: 
15 अगस्त को FIB मीडिया ने भी न्यू कुंदनपुरी में स्वतंत्रता दिवस हर्षोउल्लास से मनाया। आयोजन डाक्टर भारत की देखरेख में हुआ। मुख्य मेहमान के तौर पर विशेष समय निकल कर शामिल हुईं सीजेएम डा. गुरप्रीत कौर। विशेष मेहमान थे एम एल ए राकेश पांडे और बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा। सीजेएम डा. गुरप्रीत कौर और विधायक राकेश पांडे ने झंडा लहराने की रस्म संयुक्त तौर पर अदा की। एनजीओ "मानवता" की प्रधान स्वीटी बत्तरा  भी प्रमुख आयोजकों में रहीं। 
NGO मानवता की प्रमुख स्वीटी बत्तरा एफ आई बी कार्यालय में 
इस मौके पर मीडिया से बता करते हुए FIB मीडिया के चेयरमैन डाक्टर भारत ने स्पष्ट किया कि मैंने अपनी सारी उम्र देश की सेवा में लगाई है और यह सिलसिला आखिरी सांस तक जारी रहेगा। न मुझे आज तक कोई डरा सका न ही कोई खरीद सका। उन्होंने कहा कि इस देश की धरती का पानी पिया है। इसकी हवा में सांस ली है। एक एक सांस क़र्ज़ की तरह है। खून की आखिरी बूँद भी बहानी पड़ी तो हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा की देश को दरपेश खतरों के संबंध में उनके नेटवर्क ने बहुत कुछ जुटाया है जिसका खुलासा हम जल्द ही करेंगे।  फ़िलहाल इसकी सूचना भारत सरकार को दी जा चुकी है। 
गौरतलब है कि बहुत सी आतंकी घटनाओं की आशंका डाक्टर भारत ने बहुत पहले ही जता दी थी। इसकी चर्चा कई बार मीडिया में भी हो चुकी है। इसी जनून में डाक्टर भारत ने अब तक न अपना कुछ बनाया न ही अपने परिवार का। अब देखना है उनका यह जनून देश को आगे बढ़ाने में कितनी जल्द सहायक होता है। 
इसी बीच NGO मानवता की प्रमुख स्वीटी बत्तरा ने डा भारत और FIB मीडिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश और जनता की भलाई  हम  FIB को हर सम्भव सहयोग देंगें। 

Friday, 11 August 2017

"पत्रकारों पर आर्थिक दबाव" की चर्चा ने पहचाना मीडिया का दर्द

मीडिया सेमिनार ने दिया आर्थिक हालात सुधारने का हौंसला 
लुधियाना: 11 अगस्त 2017: (FIB मीडिया ब्यूरो):: 
सेमिनार का विषय भी अजीब था। पत्रकारों पर आर्थिक दबाव। बस हाल ही गुज़री 9 अगस्त 2017 को हुआ था इसका आयोजन। विषय अछूता सा था पर फिर भी अजीब सा लगा। 
मन में सवाल उठा-भला यह दबाव आजकल किस पर नहीं होता? 
पूछने पर बात खुली कि आम तौर पर मीडिया कर्मियों ने खुद सहेड़ा होता है यह आर्थिक दबाव। मीडिया संस्थान इनके इस तरफ झुकाव का पूरा फायदा उठाते हैं और इनका शोषण करते हैं। दुनिया के भले की आकांक्षा को लेकर अपने भले को दांव पर लगा देते हैं ये पत्रकार तांकि दुनिया का कुछ संवर सके। वे खुद रातों को जाग कर दुसरों को सावधान करते हैं। समाज को जगाये रखने वाले बिन तनखाह के प्रहरी। 
लेकिन अब बहुत हो गया। क़ुरबानी के नाम पर भावुक शोषण का यह सिलसिला लम्बे समय से जारी है।
बहुत बार बहुत से नामों तले इस तरह के मामले उठे, नारे भी लगे, संगठन भी बने, संघर्ष भी चले लेकिन प्रधानगी और दुसरे फायदों का सौदा तय होते ही भले की यह बात नारों तक सिमट कर रह जाती। हमारे पास सबूत और विवरण भी हैं। इसके बावजूद हम संकेतिक भाषा का इस्तेमाल ही उचित समझते हैं।
भावुकता की हद तक मीडिया से जुड़े इन पत्रकार साथियों के कंधों पर चढ़ कर इनके ही साथी बड़े बड़े पदों पर सत्ता सुख भोगने पहुंच जाते।  कोई सांसद बन गया और कोई मंत्री और कोई किसी बड़े नेता का पीआरओ या प्रेस सचिव। बाकी के पत्रकार खिसियानी बिल्ली की तरह कोई नया नेता या नयी यूनियन या कोई नया संगठन बनाते या तलाशते रह जाते। दिल में गुस्सा उठता, दिमाग में तूफ़ान खड़े होते लेकिन इस सब से इनका अपना ही दिल जलता। इनका फायदा उठाने वाले इन्हें कोई झूठा सा नया सपना दिखा कर खिसक लेते। ये बेचारे संघर्ष की आग में तपते रह जाते।
फिर यह गर्मी भी ठंडी हो गयी। संघर्ष की बात अतीत का हिस्सा बन गयी। झगड़ा उठता भी तो किसी न किसी नाम से क्लब बना कर प्रधानगी तक सिमट कर रह जाता। सिद्धांतो, मांगों और मुद्दों की बात किसी गए गुज़रे ज़माने की बात बन गयी।
पत्रकारों के संघर्ष और दमखम की बात याद करने और कराने का प्रयास था यह सेमिनार। कम से कम दीप जगदीप की बातें सुन कर तो यही लगा। पुराने अनुभव के साथ अब नया जोश भी शामिल है। 
इस सेमिनार के बाद लगा कि संख्या में कम ही सही पर कलम के सिपाही अब आर-पार की जंग के लिए तैयार हैं। फैसला कठिन था लेकिन करना पड़ा। इसके इलावा कोई चारा भी नहीं था शायद। इस मकसद के लिए 21 सदस्यों पर आधरित विशेष कार्य समिति बना दी गयी है। जो इस समस्या के हल पर भी ठोस काम करेगी।
थोड़ा पीछे पलट कर देखें तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। उल्लेखनीय  है कि खुद को "शुद्ध स्वदेशी" और "असली" समझने वाले मीडिया के ही कुछ लोगों ने अपने दुसरे भाईबंदों को "चाईना" कहना शुरू कर दिया था। पहले तो हमें बात ही समझ में नहीं आई लेकिन जब कुरेदा तो पता चला कि "चाईना" उन पत्रकारों को कहा जाता है जिनकी खबर उनके नाम से कहीं नज़र नहीं आती लेकिन वे हर जगह कवरेज के लिए मौजूद होते हैं। अब थोड़ी सी चर्चा "चाईना" कहे जाने वाले मीडिया कर्मियों की हकीकत पर भी की वे क्यों हर जगह होते हैं और उनकी खबर कहीं दिखती नहीं।
वे मीडिया में आते हैं बड़े जोशी खरोश से लेकिन इस मकसद के लिए आवश्यकता होती है किसी न किसी अख़बार या चैनल की। जब यह नए पंछी वहां सम्पर्क करते हैं तो इनको नज़र आने लगता है कि इतना आसान भी नहीं है कोई मीडिया संस्थान ज्वाइन कर लेना। वहां स्कियोरिटी की रकम, ब्लैंक चैक और घर की रजिस्ट्री की मांग... समझ आने लगता है मीडिया कर्मी बनने का भाव। फिर इन्हें खुद को असली कहने वाले पत्रकार अपने अपने ग्रुप में शामिल करते हैं। काम ये लोग करते हैं और नाम इनके ग्रुप लीडर का होता है। स्थिति यहाँ तक क्यों पहुंची इसके लिए भी मीडिया कर्मी खुद ज़िम्मेदार हैं। बात लम्बी है इस लिए फिर कभी सही। फ़िलहाल समस्या की एक झलक मात्र तांकि अंदाज़ा हो सके कि शोषण करने वालों में खुद मीडिया कर्मियों के अपने साथी भी पीछे नहीं रहते। 
चलो शोषण करने वाले तो शोषण करते ही हैं। दर्द उस समय और बढ़ता है जब अपने ही लोग काम का पैसा दिलवाने के लिए दिखाई देते संघर्षों के नाम पर विरोधी गुट के साथ मिले हुए नज़र आते हैं।
मीडिया संगठन के लिए पदाधिकारियों के चुनाव या सदस्यता की बात चले तो पूछते हैं--क्या आपको तनखाह मिलती है?  स्पष्ट जवाब भी देते है कि कि अगर तनखाह नहीं मिलती तो हम आपको पत्रकार नहीं मानते। सब कुछ पता होने के बावजूद वे इन लोगों को कभी "चाईना" कहते हैं और कभी कुछ और। कोई नहीं कहता कि अगर आपको काम के बावजूद आपको कूछ नहीं मिलता तो हम देखते हैं कौन नहीं देता आपको आपके काम की मेहनत। कोई नहीं कहता कि देखते हैं  कौन मारता है आपकी तनख्वाह।  इन "चाईना" कहे जाने वाले पत्रकार लोगों का दर्द पहचाना है "द पीपुल्स मीडिया लिंक" ने। जन मीडिया मंच की ओर से आयोजित इस  सेमिनार में इस  विषय पर बारीकी से चर्चा हुई।  आने वाले दिनों में शायद और भी बहुत कुछ ऐसा होगा जो मीडिया की मौजूदा हालात की तस्वीर में नए रंग भरेगा।  क्या आप तैयार हैं?  

Sunday, 6 August 2017

माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी पर DJJS का विशेष आयोजन

Sat, Aug 5, 2017 at 1:36 PM  
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से विशेष अभियान 
लुधियाना: 5 अगस्त 2017: (FIB मीडिया ब्यूरो):: 
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान जिसके संचालक श्री आशुतोश महाराज जी हैं, की ओर से लुधियाना में आज 5 अगस्त 2017 को एक स्थानीय होटल में एक प्रैस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्थान की लुधियाना शाखा की ओर से चलाई जा रही मुहिम माई अर्थ माई रिसपोंसीबिल्टी से संबंधित किताब माई अर्थ माई रिसपोंसीबिल्टी चैप्टर-अ रिपोर्ट जुलाई 2014 दिसंबर 2016 के विमोचन के संबंध में था। 
इस संबंध में संस्थान के नेचर कंजरवेशन प्रोग्राम की मुख्य इंचार्ज साध्वी आदिति भारती, प्रचारक साध्वी परमा भारती तथा लुधियाना के माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी प्रोग्राम के इंचार्ज तरसेम सिंह ने प्रैस के समक्ष विमोचन की जाने वाली किताब के बारे में जानकारी दी। 
प्रैस को संबोधित करते हुए साध्वी सुश्री आदिति भारती ने कहा कि पर्यावरण का सरंक्षण एक दिन की क्रिया नहीं है, यह तो एक जीवनशैली है, इस जीवन शैली का संचार तथा प्रारंभ करना आसान कार्य नहीं है, यह तो एक निरंतर प्रक्रिया है। माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी कैंपेन का उद्देश्य समाज को इसी जीवनशैली की ओर बढ़ाना है। 
करीब ढाई वर्ष के काल के दौरान हमने अनेकों प्रकार से नागरिकों के मनों को हिलाने की कोशिश की है तथा यह किताब हमारे कार्यों, उपलब्धियों तथा यात्रा पाठ्यक्रम को सब के समक्ष खोल देगी। यह पूछने पर कि क्या यह किताब विमोचन प्रकरण शहर में मुहिम का अंत है तो इस पर प्रोग्राम के इंचार्ज तरसेम सिंह ने कहा कि माई अर्थ माई रिस्पोंसीबिल्टी मात्र एक मुहिम नहीं, वास्तव में यह जनता की मुहिम है क्योंकि पृथ्वी सब की है। यह एक कोशिश है जिसके द्वारा शहर के लोगों को मुहिम व उसके नतीजों से अवगत करवाया जा सकेगा। यह इस का अंत नहीं! अपितु हम इसकी आवाज को दूसरे स्तर तक ले जाने की सोच रहे हैं। संस्थान ने आगामी महीनों में शहर के भीतर वायु प्रदूशण को रोकने हेतु एक विशाल जागरूकता रैली निकालने का ऐलान किया। इसके अतिरिक्त संस्थान शहर के कुछ खास इलाकों में भी कुछ ख़ास कार्य करेगा। लुधियाना के इंचार्ज तरसेम सिंह ने एक नंबर 9779824000, 9915761850 दिया और कहा कि हम यह नंबर प्रैस के माध्यम से जारी कर रहे हैं जो कोई भी घर में पौधा रोपित करना चाहता है, वह इस नंबर पर संपर्क करे, उसे मुफत डिलीवरी दी जायेगी। कांफ्रेंस के अंत में तरसेम सिंह ने मीडिया कर्मियों का उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

Saturday, 22 July 2017

पाकिस्‍तान द्वारा सैंकड़ों बार हुआ संघर्ष-विराम का उल्‍लंघन

21-जुलाई-2017 16:56 IST
आतंकी घटनाओं और घुसपैठ में भी लगातार हो रही है वृद्धि
नई  दिल्ली: 21 जुलाई 2017: (पीआईबी):: 
पिछले तीन वर्षों और मौजूदा वर्ष के दौरान पाकिस्‍तान द्वारा किये जाने वाले संघर्ष-विराम उल्‍लंघन का ब्‍यौरा इस प्रकार है :-
संघर्ष-विराम उल्‍लंघन की संख्‍या
वर्षसेना के नियंत्रण के अधीन जम्‍मू एवं कश्‍मीर राज्‍य में नियंत्रण रेखा परसीमा सुरक्षा बल के अधीन जम्‍मू एवं  कश्‍मीर राज्‍य में अंतर्राष्‍ट्रीय सीमा पर
2014153430
2015152253
2016228221
2017228
(11 जुलाई तक)
23
(30 जून तक)
पिछले तीन वर्षों और वर्तमान वर्ष के दौरान संघर्ष-विराम उल्‍लंघन में हताहत होने वाले सुरक्षा कर्मियों/नागरिकों का ब्‍यौरा निम्‍न प्रकार है :-
समयसैन्‍य कर्मी*बीएसएफ कर्मी #नागरिक#
मृतक घायलमृतक घायलमृतकघायल
20140111021714101
2015061704091671
2016087405251383
2017042101030314
* 11 जुलाई, 2017 तक
# 30 जून, 2017 तक
सुरक्षा कर्मियों के नजदीकी रिश्‍तेदारों को दी जाने वाली एकमुश्‍त अनुग्रह राशि का ब्‍यौरा :-
क्र.सं.विवरण01/01/2006 से प्रभावी 01/01/2016 से प्रभावी 
1.आतंकी हिंसा में कर्तव्‍य निवर्हन के दौरान मृत्‍यु होने पर10 लाख रूपये25 लाख रूपये
2.युद्ध में दुश्‍मन की गतिविधियों या सीमा संघर्षों या उग्रवादियों,आतंकियों आदि के विरूद्ध कार्रवाई में होने वाली मृत्‍यु15 लाख रूपये35 लाख रूपये
3.सेना सामूहिक बीमा निधि30/09/16 से प्रभावी 01/10/16 से प्रभावी
अधिकारी60 लाख रूपये75  लाख रूपये
जेसीओ/अन्‍य पद30 लाख रूपये37.5 लाख रूपये
इसके अतिरिक्‍त नियमानुसार उदार पारिवारिक पेंशन, मृत्‍यु-सह-सेवानिवृत्ति-ग्रेच्‍युटी आदि जैसे अन्‍य लाभ।

केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों/राज्‍य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मृत नागरिकों, सुरक्षाबल कर्मियों को अनुग्रह राशि/मुआवजे का भुगतान किया जाता है।
सरकार द्वारा उठाये गये प्रति‍रोधी कदम :- दुश्‍मन की गोलाबारी का मुकाबला करने के लिए सभी अग्रिम चौकियों को मजबूत बनाया गया है। अपनी कैजुअल्‍टी को न्‍यूनतम करने के मद्देनजर दुश्‍मन की गोलाबारी के खिलाफ मानक अभियान प्रक्रिया मौजूद है।
भारतीय फौज आवश्‍यकता पड़ने पर संघर्ष-विराम उल्‍लंघन का उचित जवाब देती है। इसके अतिरिक्‍त संघर्षविराम उल्‍लंघन का मुद्दा मौजूदा प्रणाली के तहत हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच होने वाली साप्‍ताहिक वार्ता के दौरान उठाया जाता है।
हाल में जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य में नियंत्रण रेखा पर दुश्‍मनों द्वारा किसी भी प्रकार की सशस्‍त्र घुसपैठ नहीं हुई है। 
सेना के विरूद्ध आतंकी घटनाओं का ब्‍यौरा इस प्रकार है :-
वर्षघटनाओं की संख्‍यासैन्‍य कैजुअल्‍टी
201504-
20160931
2017
(11 जुलाई, 2017 तक)
1409

नियंत्रण रेखा पर नाकाम घुसपैठ प्रयासों (आईबीई) और कैजुअल्‍टी का विवरण इस प्रकार है :-
वर्षआईबीई की संख्‍यामारे गये आतंकीशहीद सैन्‍य कर्मी
2014233909
2015183008
2016273709
2017
(11 जुलाई, 2017 तक)
163603

संघर्ष की स्थिति को छोड़कर शेष सभी प्रतिस्‍थापनाओं में सेना में महिला अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है।

यह जानकारी आज लोकसभा में श्रीमती सुप्रिया सुले एवं अन्‍य को दिये गये एक लिखित उत्‍तर में रक्षा राज्‍य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने दी।  (PIB)
वीके/एकेपी/जीआरएस  – 3081   

Thursday, 6 July 2017

हिमाचल के तीर्थ स्थलों के हालात दयनीय हालत में?

कहां सोये हैं हिन्दु धर्म के ठेकेदार कहलाने वाले लोग?
हिमाचल प्रदेश के विशेष दौरे से लौट कर Dr.Bharat :⇒   Media Intelligence 
मां चामुंडा धाम की व्यवस्था ख़राब , उखड़ी टूटी सड़कों रास्तों पर पैदल चलना मुश्किल , रख रखाव व्यवस्था राम भरोसे , गंदगी का साम्राज्य जिम्मेदार सरकारी अधिकारी और मंदिर प्रबंधक कमेटी सिर्फ अपनी तिजोरी भरने तक सीमित ,मानवता ,धर्म कर्म सब  कूड़े के ढेर में गएहैं  क्या ?
       मौजूदा  समय में जब देश विदेश में भारत देश की छवि को उज्वल करना जरुरी हो, और देशी विदेशी सैलानी,  भक्त  भारत के धार्मिक ,ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करने हेतु  देश के विभिन्न  क्षेत्रों में आते  जाते हैं, जिससे जहाँ भारत देश की सांस्कृति छवि का निखार होता है  और वहीँ स्थानीय लोगों का जीवन यापन घर परिवार का गुजर बसर पालन होता है। 
      ऐसे में माँ  चामुंडा धाम एक प्राचीन धार्मिक ,ऐतिहासिक स्थान अपना एक अलग महत्व रखता है। पर पिछले एक दो साल से ही इस स्थान पर अव्यवश्था और लापरवाही का शिकार है , सम्बंधित अधिकारी अपनी मनमानी अकर्मण्डयता को गले लगाकर कुम्भकर्णी नींद में मस्त हैं।  मंदिर के अगल बगल की बात दर किनार कजो भक्त यात्री   आगन्तुओं को अपनी तरफ खींचती है वह है सरोवर उद्दान , पहाड़ी नदी में स्नान करने हेतु बनाई गयी सीढ़िया, पर इन दोनों स्थलों पर ?  सरोवर गंदगी का ढेर , सरोवर के गमले ,गार्डन ,उद्दान , कुव्यवस्था , लापरवाही , भ्रष्टाचार , नालायकी  की वजह से  हालात  जर्जर ख़राब , सरोवर के अगल बगल बनी राम , गणेश , शंकर  जी की मूर्तियों   व  अन्य  मूर्तियों की पेंटिंग  उखड़ने की वजह से और कुछ टूटी खंडित मूर्तियों की  हालत खस्ता।जब इस सारे अनियमताओं  के सन्दर्भ में स्थानीय दुकानदारों से बात चीत कर जानकारी लीगयी  तो स्थानीय दुकानदार और होटल वाले भी दुखी  होते हुए  SDM, तहसीलदार ,और प्रबंधक कमेटी  को जिम्मेदार बताया  
     प्राचीन प्रवेश द्धार से लेकर मंदिर के पुराने मुख्यद्वार तक रास्ता जर्जर  और आखिरी सांसे  गिन रहा है। मेन  सड़क  के  मुख्य प्रवेश द्वार से ( जिस गेट को फौजी बटालियन  ने बनवाया )  मंदिर के प्रवेश तक , आगे  लंगर हाल तक  टूटी सर्ड्को  और गड्ढों  की वजह से रास्ता सड़क पर पैदल चलना  आने जाने  वाले  यात्रियों  के पैरों  में चोट और ठोकर खाकर  गिरते यात्री  किसे अपना  दुखड़ा सुनाएँ  
         यात्रियों को आराम  स्नान के लिए  नदी नुमा  आते पहाड़ी पानी  में नहाने के लिए  कभी  पौढ़ी  सीढ़िया  बनायीं गयीं थीं  लेकिन  सीढ़ियां  भी जगह जगह से टूटी  और  गंदगी  से भरपूर।   


        ऐसे हालत में मंदिर प्रभंधक कमेटी  जिला प्रशासन सरकारी अनुदान से सौदर्यीकरण कर चार चाँद लगा सकते हैं , पर सौंदर्यीकरण क्या  गंदगी कर्ण  सर चढ़ कर बोलता है। ऐसे गंदगी , कू  व्यवस्था  टूटे   रास्ते , गंदा सरोवर का पानी , जंगल  जैसी  फुलवारी गमले   क्या सम्बन्धित  अधिकारीयों  को दिखाई नही देती , क्या  DM,SDM, तहसीलदार  सब मौज मस्ती  के लिए तैनात है.  क्या  फर्ज के अंधे हो चुके हैं  ऐसे  लोगों को यह सब दिखयी नहीं देता ।   कौन है  इन सब का जिम्मेदार ?अपने आप को हिन्दू धर्म का ठेकेदार  अनुआयी  कहने वालों   अगर  सेवा  सफाई  को देखना है तो  सिख पंथ  और  सिख  गुरद्वारों  की सेवा और सफाई  से शिक्षा लेकर  ऐतिहासिक धर्म स्थलों पर सेवा  की भावना के साथ अपना धर्म निभाएं।   खाली  तिलक  लगा लेने और भगवा रंग धारण करने से कोई सच्चा  भारतीय  सच्चा हिन्दू नहीं हो जाता  कुछ ऐसे ही पाखंडी लोगों से विश्व के प्राचीन और अखिल ब्रह्मांडीय सनातन धर्म  और भारतीय  संस्कृति  का जनाजा  निकलता है। 
      इस सारी अनियमताओं ,कु व्यवस्था  और  लापरवाही  के सन्दर्भ  में  FIB. फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो  की तरफ से  हिमाचल  के मुख्यमंत्री  एंव  काँगड़ा के DM, SDM को विशेष पत्र  भेजते हुए  आवश्यक  उठाने की मांग की है। 

Saturday, 1 July 2017

GST लागू: यह दिन देश का एक निर्णायक मोड़-PM मोदी

30-जून-2017 23:59 IST
ऐतिहासिक मध्‍य रात्रि सत्र के बीच भारत में GST की शुरुआत

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, संसद के सदस्‍यगण और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति 30 जून, 2017 को नई दिल्ली में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के शुभारंभ के अवसर पर संसद के केन्द्रीय कक्ष में। 
The Prime Minister, Shri Narendra Modi, the Members of Parliament and other dignitaries at the ceremony to launch the Goods & Service Tax (GST), in Central Hall of Parliament, in New Delhi on June 30, 2017.
नई दिल्ली: 30 जून 2017: (पीआईबी//FIB मीडिया ब्यूरो)::

संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित ऐतिहासिक मध्‍य रात्रि सत्र के बीच आज मध्‍य रात्रि से वस्‍तु एवं सेवा कर व्‍यवस्‍था लागू हो गई। राष्‍ट्रपति एवं प्रधानमंत्री द्वारा बटन दबाकर देश में जीएसटी की शुरुआत करने से पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभा को संबोधित किया। 

इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन देश का भविष्‍य निर्धारित करने के लिहाज से एक निर्णायक मोड़ है। 
उन्‍होंने याद किया कि संसद का यह केंद्रीय कक्ष पहले भी कई ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी रहा है जिसमें संविधान सभा का पहला सत्र, भारत की आजादी और संविधान को अंगीकार करना शामिल हैं। उन्‍होंने जीएसटी को सहकारी संघवाद का एक उदाहरण बताया। 
उन्‍होंने चाणक्‍य का उल्‍लेख करते हुए कहा कि कड़ी मेहनत सभी बाधाओं को दूर कर सकती है और यह हमें सबसे कठिन उद्देश्‍यों को पूरा करने में भी मदद करती है। उन्‍होंने कहा कि जिस प्रकार सरदार पटेल ने देश का राजनीतिक एकीकरण सुनिश्चित किया था, उसी तरह जीएसटी आर्थिक एकीकरण सुनिश्चित करेगा। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन, जिन्‍होंने कहा था कि आयकर दुनिया में समझने के लिए सबसे मुश्चिकल चीज है, को याद करते हुए उन्‍होंने कहा कि जीएसटी एक राष्‍ट्र-एक कर सुनि‍श्चित करेगा। उन्‍होंने कहा कि जीएसटी से समय और लागत में काफी बचत होगी। उन्‍होंने यह भी कहा कि राज्‍य की सीमाओं को पार करते समय होने वाली देरी से जलने वाले इंधन की अब बचत होगी और इससे पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी एक आधुनिक कर प्रशासन को बढ़ावा देगा जो अपेक्षाकृत आसान एवं अधिक पारदर्शी होगा और इससे भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। 

Thursday, 29 June 2017

मादक पदार्थों के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के विरूद्ध अंतराष्ट्रीय दिवस

 28-जून-2017 18:52 IST
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का जनजागरण कार्यक्रम
The Union Minister for Social Justice and Empowerment, Shri Thaawar Chand Gehlot addressing at a programme on the occasion of the “International Day against Drug Abuse & Illicit Trafficking”, organised by the Ministry of Social Justice & Empowerment, in New Delhi on June 28, 2017.
नई दिल्ली:28 जून 2017: (पीआईबी//FIB मीडिया)::
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने मादक पदार्थों के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के विरूद्ध अंतराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आज यहां एक समारोह आयोजित किया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर और श्री विजय सांपला के अलावा भारत में यूएनओडीसी के प्रतिनिधि श्री सरगी कैपीनोस, मंत्रालय में सचिव श्रीमती जी.लता कृष्ण राव और अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
इस अवसर पर थावर चन्द गहलोत ने युवाओं और जनता का आह्वान किया कि वे देश को मादक पदार्थों और अवैध तस्करी से मुक्त करायें। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया जा सकता। इस बुराई को समाप्त करने के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है। उन्होंने मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए अनेक व्यक्तियों और इस क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ के प्रयासों की सराहना की और जानकारी दी की उनका मंत्रालय नशा करने वालों की पहचान करने, उनके इलाज और पुनर्वास के लिए स्वयं सेवी संगठनों के जरिए समुदाय आधारित सेवायें प्रदान करता है।
अपने संबोधन में श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए सरकार ने अनेक पहल की हैं और परिवार के सदस्य तथा समाज बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्री विजय सांपला ने कहा कि लोगों को मादक पदार्थों की बुराइयों के प्रति जागरूक करना चाहिए और अनेक संगठन इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी देखी। भारत में यूएनओडीसी के प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव का संदेश पढ़ा। इस अवसर पर एक नृत्य नाटिका दिखाई गयी।
मंत्रालय मादक पदार्थों के दुरूपयोग की निगरानी करता है जिसमें नशा करने वालों की समस्या का आकलन, एहतियाती उपाय, इलाज और पुनर्वास, सूचना का प्रसार और जनजागरण शामिल है। मंत्रालय नशा मुक्ति केन्द्र चलाने के लिए देश भर के करीब 400 एनजीओ को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। मंत्रालय ने नशा मुक्ति के लिए 24 घंटे की एक टोल फ्री सेवा भी स्थापित की है।
इससे पहले आज सुबह नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर ‘मादक पदार्थ के दुरूपयोग के विरूद्ध दौड़’ आयोजित की गयी जिसमें 4000 लोगों ने भाग लिया। श्री थावर चंद गहलोत ने इस दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर श्री गुर्जर, श्री सांपला, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्रालय की सचिव जी. लता के अलावा अनेक अन्य लोग उपस्थित थे। (PIB)
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Sunday, 25 June 2017

अब भारत अफगान दोस्ती के प्रतीक सलमा बांध पर आतंकी हमला

10 अफगान पुलिस वालों की हत्या 
Courtesy Photo: Dabang Duniya 
FIB मीडिया इंटरनेशनल डेस्क की ख़ास रिपोर्ट 
     आतंक के निशाने पर पूरी दुनिया है। आतंकी संगठनों की सही सही संख्या का पता लगाना भी मुश्किल है। अब नया हमला हुआ है सलमा बांध पर। अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों ने सलमा बांध पर हमला करके 10 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। गौरतलब है कि सलमा बांध को भारत सरकार की मदद से बनाया गया था, जिसे 'अफगानिस्तान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम' भी कहा जाता है। इसी बांध के चेकपोस्ट पर तालीबानी आतंकियों ने हमला किया और 10 अफगानी पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी।
     तालिबानी आतंकियों ने शनिवार की देर रात ये हमला बोला था। इस हमले में कम से कम 4 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। 'अफगानिस्तान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम' हेरात प्रांत में है, जिसे भारत की मदद से बनाया गया है और अफगानिस्तान की सरकार ने इसे अफगानिस्तानियों को दिया भारतीय तोहफा माना है। इस सौगात को निशाना बनाना साफ़ ज़ाहिर करता है कि  आतंकी संगठन इस दोस्ती से परेशान हैं और इसके खिलाफ हैं। 
        इस मामले में सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक भारी हथियारों से लैस तालिबानी आतंकियों ने चाश्त जिले में बने सलमा बांध के साथ के चेकपोस्ट पर हमला किया। हमला बहुत ही अचानक था।  सम्भलने का मौका भी नहीं था। तालिबानी आतंकी पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद फरार होने में भी सफल रहे। इस दौरान दोनों ही तरफ से जोरदार गोलीबारी हुई, पर तालिबानी आतंकी अफगानी सुरक्षाबलों पर भारी पड़े। अफगानिस्तान में भारत के राजदूत मनप्रीत वोहरा ने भी इसे तालिबानी हमला बताया है। इस हमले के बाद सारी रणनीति पर दोबारा विचार आवश्यक लग रहा है। 
इसके साथ ही तालिबान ने कराची एयरपोर्ट हमले की जिम्मेदारी भी स्वीकार की है। 
उल्लेखनीय है कि सलमा बांध यानि 'अफगानिस्तान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम'  का जून 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी ने उद्घाटन किया था। ये प्रोजेक्ट 1700 करोड़ रुपयों में बना है, जो हेरात प्रांत में रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण जगह पर है। इस बांध को चिस्ती शरीफ नदी पर बनाया गया है, जिससे 42 मेगावॉट बिजली का उत्पादन तो होता ही है, साथ ही 75 हजार हेक्टेयर खेती की जमीन पर सिंचाई भी होनी है। इस से वहां के विकास की गति को पंख लग गए थे। 
      यह भी बता दें कि अफगानिस्तान में साल 2014 से अमेरिकी फौजों के वापस लौटने और अपनी भूमिका को अफगानी सुरक्षाबलों के सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियानों तक सीमित करने के बाद तालिबान तेजी से अपने पैर पसार रहा है। अब देखना यह है कि इस मामले पर सभी देश एकजुट हो कर कोई कदम उठाते है या नहीं?

Saturday, 24 June 2017

श्रीनगर के पंथा चौक में CRPF पर आतंकी हमला

एक जवान शहीद: दो घायल: इलाके में सर्च आपरेशन
जम्मू: 24 जून 2017: (FIB मीडिया ब्यूरो)::
हम कई बार चेता चुके हैं। खतरा दिन प्रति दिन बढ़ रहा है। आसमान पर तबाही के बादल मण्डरा रहे हैं।
वतन की फिक्र कर नादान, 
मुसीबत आने वाली है 
तेरी बर्बादियों के मशविरे हैं आसमानों में। 

न समझोगे तो मिट जाओगे ए हिन्दुस्तान वालों 

तुम्हारी दास्तान तक न होगी दस्तानों में। 
FIB मीडिया की बातें कई बार सच निकल चुकी हैं। आतंकी खतरे लगातार गहरा रहे हैं। दुःख है कि  कई बार चेताने के बावजूद इन खतरों को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया जितना लिया जाना चाहिए था। अब नई  खबर आ रही है जम्मू कश्मीर से। जम्मू कश्मीर में शनिवार को एक बार फिर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया गया है। जानकारी के अनुसार श्रीनगर के पंथाचौक में सीआरपीएफ जवानों के एक काफिले पर आतंकियों द्वारा फायरिंग की गई है। आतंकी हमलों में लगातार वृद्धि बहुत ही गंभीर खतरों का संकेत है लेकिन हमारे देश के राजनीतिज्ञ भांग पीकर कुम्भकर्णी नीद में हैं ।   

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित पंथा चौक में आतंकियों द्वारा शाम करीब 6 बजे के आसपास सीआरपीएफ जवानों के एक काफिले पर फायरिंग की है। इस हमले में सीआरपीएफ का एक जवान शहीद हुआ है जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इलाके में सनसनी का माहौल है। 

हमारे सूत्रों के मुताबिक आतंकियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले के बाद इलाके को सुरक्षाबलों द्वारा घेर लिया गया है। आतंकी हमले के बाद से ही इस पूरे इलाके को सीज करके आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसमें सुरक्षा बलों को क्या सफलता मिलती है इसका खुलासा होते ही हम अपने पाठकों को इसका विवरण देंगें। 


Friday, 2 June 2017

सैनिकों का कल्याण//विशेष लेख//*रंजीत कुमार


18-मई-2017 13:22 IST
सैनिकों की भलाई के लिए उठाये गए कदमों की विशेष चर्चा 
रंजीत कुमार  
मशीन के पीछे जो इंसान है वह भी पूरी तरह से तंदुरुस्त और सुविधा संपन्न होना चाहिए। पिछले तीन वर्षों के दौरान एनडीए सरकार का यह मिशन रहा है। जब लाखों डॉलर की लागत से हथियार प्रणालियों और विभिन्न उपकरणों को खरीदा जाता है, तो सेना के जवान और अधिकारी इनकी बेहतर तरीके से देखभाल करते हैं, ताकि युद्ध के समय इनका प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। ऐसे में इन जवानों और अधिकारियों का भी तंदुरुस्त एवं सुविधा संपन्न होना जरूरी है। एनडीए सरकार ने सत्ता संभालने के बाद, न केवल सैनिकों के भुगतान एवं भत्तों तथा पेंशन में बढ़ोतरी की घोषणा की है, बल्कि उनके जीवन को आसान बनाने के लिए कई कारगर कदम भी उठाए हैं। देश तब तक युद्ध नहीं जीत सकता, जब तक युद्ध लड़ने वाले सैनिकों को उनके कल्याण के लिए आश्वस्त न किया जाए। एक असंतुष्ट सैनिक से देश के लिए बलिदान देने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए एनडीए सरकार सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने और उनके कल्याण के बारे में बातें कर रही है और इस दिशा में कई कारगर कदम भी उठा रही है।

सैनिकों के कल्याण की दिशा में उठाए गए प्रभावशाली कदमों में से एक वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को स्वीकार किया जाना है। देश के सैनिक पिछले चार दशकों से वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे थे। सरकार ने 07 नवंबर 2015 को वन रैंक वन पेंशन को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लागू करने की घोषणा कर दी। इसके लागू होने से सरकारी ख़जाने से प्रतिवर्ष करीब 8000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वन रैंक वन पेंशन ने रक्षा सेवा के सैनिकों के बीच पेंशन को लेकर व्याप्त असमानताओं और अस्थिरताओं में सुधार सुनिश्चित किया है। पिछले वर्ष 30 नवंबर तक, पहली किश्त और एकमुश्त भुगतान के तहत 19,64,350 सैनिकों को 3,985.65 करोड़ रुपयों का भुगतान किया जा चुका है। दूसरी किश्त में 15,46,857 सैनिकों को 2281.63 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया।

इसके अलावा सरकार ने 3 मई, 2017 को 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर अधिसूचित कर दिया। इससे सेवा कर्मियों के वेतन और भत्तों में भारी वृद्धि होगी। आयोग ने पहली बार, सभी सैन्य कर्मियों के सैन्य सेवा वेतन (एमएसपी) में काफी अधिक वृद्ध की है और उच्च जोखिम वाली स्थिति में तैनात नौसेना और वायुसेना के जवानों को विशेष भत्ते दिए जाने की अनुशंसा की गई है।

सेवारत और सेवानिवृत्त लाखों सैनिकों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में अधिक पॉलिक्लिनिक और रेफरल अस्पतालों की शुरुआत कर कर्मचारी अंशदान स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) का दायरा बढ़ाया है। सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए कई प्रभावी कदम कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा सुधारों के क्रम में सेवानिवृत्त अंशदान स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) को पूर्ण रूप से डिजिटल किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत कुल 50 लाख लाभार्थी शामिल हैं। फिलहाल इस योजना को 28 क्षेत्रीय केन्द्रों और 426 पॉलिक्लिनिकों के जरिए चलाया जा रहा है। ईसीएचएस लाभार्थियों को नकदरहित उपचार की सुविधा मुहैया कराने के लिए कुल 1445 सिविल अस्पतालों को इस योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।

महिलाओं को सशक्त करने और उनके कल्याण के मद्देनज़र, सरकार ने लड़ाकू टुकड़ियों में महिलाओं को शामिल करने को मंज़ूरी दी है, ताकि उन्हें भारतीय वायुसेना की सभी शाखाओं और धाराओं में शामिल होने के लिए योग्य बनाया जाए। इस योजना के तहत महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष समरूप समान मानदंडों के अनुसार चुना जा रहा है। इसके अलावा, समरूप समान मानदंडों को स्थायी कमिशन प्रदान करने के लिए महिलाएं एवं शॉर्ट सर्विस कमिशन दोनों तरह के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागू किया गया है। 18 जून 2016 भारत की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन था, क्योंकि इस दिन तीन महिला लड़ाकू पायलटों को डूंडीगल में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। इसके साथ ही, भारती उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया था, जिनके पास महिला लड़ाकु पायलट हैं।

प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के तहत, सेना कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया और संचार नेटवर्क को पूरी तरह से डिजिटल किया जा चुका है। एक विशेष सॉफ्टवेयर प्रणाली – आर्मी रिकॉर्ड ऑफिसर प्रोसेस ऑटोमेशन (एआरपीएएन) 2.0 भी शुरू किया गया है। इस सॉफ्टवेयर ने 12 लाख से अधिक जूनियर कमिशन अधिकारियों और जवानों को अपने सर्विस रिकॉर्ड और नौकरी से संबंधित विभिन्न जानकारियां ऑनलाइन प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

01 जुलाई 2015 से सेना की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा चुका है। अधिकारियों, जेसीओ और अन्य अधिकारी एवं कर्मियों के चयन के लिए भर्ती महानिदेशालय की एक नई वेबसाइट की शुरुआत की गई है। अब देशभर के उम्मीदवार इस वेबसाइट पर जाकर, सेना में रोज़गार एवं करियर के विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उपयुक्त विकल्प का चयन कर उसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

सेना के दिग्गजों को बेहतर और व्यापक देखभाल प्रदान करने के लिए सेना ने 14 जनवरी, 2016 को दिल्ली कैंट में डायरेक्टरेट ऑफ इंडियन आर्मी वेटरन्स की स्थापना की। यह निदेशालय सेना के दिग्गजों को वयोवृद्ध देखभाल और सहायता सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करेगा। इसके साथ ही यह निदेशालय सेना के दिग्गजों, उनकी विधवाओं और परिजनों की शिकायतों और समस्याओं का एक ही स्थान पर समाधान प्रदान करने वाली एक संस्था के तौर पर कार्य करेगा। इस नए निदेशालय का उद्घाटन काफी धूमधाम से उत्साह के साथ किया गया।

सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 22 अगस्त 2016 को पायलट परियोजना के तौर पर एक आर्मी कौशल प्रशिक्षण केन्द्र (एएसटीसी) भी स्थापित किया। इस केन्द्र की स्थापना के साथ ही, सैनिकों के जीवनसाथी और उनके परिवारजनों को कौशल विकास की धारा में जोड़डकर भारतीय सेना ने एक नए मिशन की शुरुआत की है। एएसटीसी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सैनिकों के जीवनसाथी और उनके परिवार के सदस्यों को एनएसडीसी की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे और ये सभी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत रोज़गार पाने अथवा ख़ुद का उद्योग स्थापित करने के लिए योग्य होंगे।

दूरदराज, ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने के दौरान अपने परिवार से लंबे समय तक दूर रहने और कठिनाइयों का सामना करने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर विवाहित आवास परियोजना (एमएपी) में तेजी लाने के लिए कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत अपनी तैनाती के स्थान पर कार्यरत विवाहित जवानों को करीब 2,00,000 आवासों की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। एमएपी के तीसरे और अंतिम चरण के अंतर्गत करीब 71,000 आवास इकाइयां उपलब्ध कराने की योजना कार्यान्वयन के अंतर्गत आगे बढ़ रही है। (PIB) 
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*लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।  
लेख में व्‍यक्‍त विचार लेखक के अपने हैं।

Thursday, 1 June 2017

आओ दिल से दिल मिलाएं प्रेस क्लब खुद-ब-खुद बन जायेगा

Updated on June 2nd 2017 at 1:40 PM
FIB मीडिया इस मामले में पहल करने को तैयार-डा. भारत 
लुधियाना: 1 जून 2017: (FIB मीडिया ब्यूरो)::
फेसबुक पर महीपाल साथी ने आदित्य कमल जी की एक ग़ज़ल पोस्ट की है। इसका मतलााअ  है: 
आंकड़ों से खेलना, उनका शुगल मशहूर है,
ज़िंदगी अपनी, मगर उन आंकड़ों से दूर है।  

इन पंक्तियों से याद आई लुधियाना के सर्कट हाऊस में हुई पत्रकारों की विशेष बैठक। भीड़ बहुत थी। उत्साह भी बहुत था। जोश भी बहुत था। संकल्प भी ज़ोरदार था और इरादा भी मज़बूत। इस बैठक में मुख्य मांग थी प्रेस क्लब की। वास्तव में यह मांग नहीं पत्रकारों का अधिकार है। इतनी बड़ी संख्या में पत्रकार मांग कर रहे हैं और सरकार भी सैद्धांतिक तौर पैर प्रेस क्लब देने को तैयार है। इसके बावजूद देरी क्यों हो रही है? मामला हर बार खटाई में क्यों पड़ जाता है? ओशो कहते हैं इंसान जिस चीज़ के काबिल हो जाता है वह उसे तत्क्षण मिल जाती है। एक पल की भी देरी नहीं होती। यह प्रकृति का नियम है। हम हर बार प्रेस क्लब पाते पाते फिर खो बैठते हैं तो समझना होगा कि आखिर गड़बड़ कहां है? हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है? हर बार दिल्ली दूर क्यों हो जाती है? हर क्षेत्र में लुधियाना जैसा बड़ा स्टेशन एक प्रमुख मीडिया सेंटर बनने के बावजुद भी अभी तक प्रेस क्लब से वंचित क्यों?  आदित्य कमल अपनी ग़ज़ल के आखिरी शेयर में कहते  हैं:
वहाँ जनपथ पर खड़ा हिंदोस्ताँ है पूछता,
भाई साहब, यहाँ से दिल्ली औ' कितनी दूर है?

मैं क्षमा चाहता हूँ पर मुझे सर्कट हाऊस में हुई इस मीटिंग की स्थिति भी कुछ इसी तरह की लगी।  मीटिंग में मौजूद पत्रकारों की संख्या बहुत बड़ी होने के बावजूद बहुत से प्रमुख लोग गैर हाज़िर क्यों थे? बहुत से वरिष्ठ मीडिया कर्मी कुर्सी न होने के कारण खड़े होने को मजबूर थे। 
अगर हम सभी अपना अंतर्मन टटोलेंगे तो समस्या का सही रूप भी नज़र आएगा और समस्या का हल भी मिलेगा। अतीत के संघर्षों का एक बार फिर अवलोकन करना होगा। गैरहाज़िर लोगों के दिल और दिमाग में क्या है इसका सच्चे मन से पता लगाना होगा। अगर कुर्सी या पद इस मामले में रुकावट डालते हैं तो सभी को आगे आ कर स्पष्ट करना हो गए की हम को कोई भी पद नहीं चाहिए। जब सभी सदस्य पदों के लालच ऐ मुक्त हो कर सामने आ जायेंगे तो सबसे अधिक निःस्वार्थ लोगों की टीम का चुनाव आसानी से हो जायेगा। वो कहते हैं न.... दिल मिले या न मिले--हाथ मिलाते रहिये....बहुत अछहि इसमें लेकिन इस खूबसूरत अंदाज़ और मनमोहक औपचारिकता से कुछ समय के लिए बचते हुए दिल मिलाने की तरफ भी ध्यान देना ज़रूरी है।  
कभी किसी शायर ने कहा था- 
खुदा मुझको ऐसी खुदाई न दे !
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे। 
कहीं इस मामले में भी ऐसा ही कुछ तो नहीं हो रहा? जिस दिन हम सभी का सम्मान करना सीख जायेंगे। सभी को साथ ले कर चलना सीख जायेंगे। सभी के मन एक दुसरे के सामने खुल जायेंगे उस दिन होगी सच्ची एकता। उस दिन प्रेस क्लब जैसी सभी सुविधाएँ आपके पीछे पीछे होंगीं। अगर आप सभी ने उचित समझा तो FIB मीडिया इस मामले में पहल करने को तैयार है। इस संबंध में हमारे पास एक ठोस योजना है। यह योजना समस्या का पूरा अध्यन करने के बाद बनाई गयी है। वक़्त आने पर इसे सभी के आमने रखा भी जायेगा। फिलहाल दिल से दिल मिलाना ज़रूरी है। अगर किसी के दिल में भी किसे के भी प्रति नफरत या साज़िश की कोई चिंगारी है तो उसे वहां से हटाना समय की सबसे पहली ज़रूरत है। मीडिया लड़ता रहे, गुटबंदियों में घिरा रहे इसका फायदा किसकोहो सकता है यह सोचना हम सभी को सहीं राह पर ले जायेगा।  


Saturday, 13 May 2017

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज चंडीगढ़ में

12-मई-2017 18:56 IST
उत्‍तरी क्षेत्र परिषद बैठक की अध्‍यक्षता की 
चंडीगढ़: 12 मई 2017: (FBI मीडिया//PIB):: 
हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, पंजाब व राजस्‍थान राज्‍यों, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली और संघ शासित राज्‍य चंडीगढ़ की उत्‍तरी क्षेत्र परिषद की 28वीं बैठक केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता में दिनांक 12 मई, 2017 को चंडीगढ़ में आयोजित की गई।

     परिषद की बैठक में उप मदों सहित सदस्‍य राज्‍यों के समान हितों के 18 मुद्दों पर चर्चा तथा विचार-विमर्श किया गया। जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें उत्‍तरी राज्‍यों में वित्‍तीय  और अवसंरचनात्‍मक सद्भाव की आवश्‍यकता; राज्‍यों से फल, पुष्‍प एवं सब्जियों के निर्यात के संयुक्‍त प्रयासों; इस क्षेत्र की विभिन्‍न नदियों के जल तथा पनबिजली का राज्‍यों के बीच बंटवारा; नुकसानदायक अपशिष्‍ट के निपटान के लिए सामान्‍य उत्‍प्रवाही उपचार संयत्रों और उपचार भंडारण एवं आपदा सुविधा (टीएसडीएफ), हरिके बैरेज से निकलने वाली राजस्‍थान की नहरों में प्रदूषण और पंजाब में भाखड़ा मुख्‍य लाइन नहर पर 27 स्‍थानों पर कुल 63.75 मेगावाट विद्युत वाली लघु पनबिजली परियोजनाओं की स्‍थापना आदि विषय शामिल थे। बैठक में आज जिन 18 विषयों पर चर्चा की गई, उनमें से 7 विषयों का निपटान कर लिया गया है।

     औद्योगिक क्षेत्रों के उत्‍प्रवाहियों तथा कस्‍बों के सीवेज का यमुना नदी और घग्‍गर नदी तथा राजस्‍थान की नहरों में बहाया जाना एक अंत:राज्‍यीय समस्‍या है। एक बड़े कदम के रूप में सभी सदस्‍य राज्‍यों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मार्गदर्शन में जल प्रदूषण की समस्‍या को संयक्‍त रूप से निपटारा करने के बारे में आम सहमति व्‍यक्‍त की। फलों, फूलों और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपीडा ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्‍थान के लिए परियोजनाओं को स्‍वीकृति प्रदान की है। राज्‍यों से यह अनुरोध किया गया कि वे जल और पनबिजली के बंटवारे के विवादित मामलों को सम्‍बन्धित केन्‍द्रीय मंत्रालयों की मध्‍यस्‍थता  से सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाएं।

     राज्‍यों के बीच अत:राज्‍य सहयोग और समन्‍वय को बढ़ावा देने के लिए राज्‍य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पांच क्षेत्रीय परिषदों का गठन किया गया था। इनको आर्थिक रूप से, राजनीतिक रूप से एवं सांस्‍कृतिक रूप से एक दूसरे से जुड़े राज्‍यों के लिए एक संयुक्‍त प्रयास के रूप में किसी मामले पर चर्चा और सिफारिश करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई। उच्‍च स्‍तरीय सुसम्‍बद्ध निकाय होने के कारण ये राष्‍ट्रीय दृष्‍टिकोण के साथ-साथ क्षेत्रीय कारकों को ध्‍यान में रखते हुए विशिष्‍ट मुद्दों पर ध्‍यान केन्द्रित करने में समर्थ हैं।

     वर्तमान केन्‍द्र सरकार ने इन क्षेत्रीय परिषदों को सशक्‍त बनाया है। वर्ष 2015 से विभिन्‍न क्षेत्रीय परिषदों की 09 बैठकें तथा इनकी स्‍थायी समितियों की 11 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में कुल 699 मुद्दों पर चर्चा की गई और 345 का निपटान किया गया है।

     बैठक के अंत में केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने बैठक में मौजूद सभी मुख्‍यमंत्रियों, मंत्रियो एवं मुख्‍य सचिवों को सलाह दी कि कश्‍मीरी विद्यार्थियों एवं नौजवानों को, चाहे वो देश में कहीं भी हों, के साथ सही बर्ताव किया जाना चाहिए और उन्‍हें आसान माहौल प्रदान किया जाए। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक पूरे भारत के सब नौजवान और युवतियां अपने बच्‍चे हैं और उनके साथ उसी प्रकार का व्‍यवहार किया जाना चाहिए। 

     आज की बैठक में हरियाणा और पंजाब के मुख्‍यमंत्रियों, संघ-राज्‍य क्षेत्र चंडीगढ़ के प्रशासक, राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली के उप-राज्‍यपाल, जम्‍मू एवं कश्‍मीर तथा राष्‍ट्रीय राष्‍ट्रीय क्षेत्र दिल्‍ली के उप मुख्‍यमंत्रियों, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, पंजाब, राजस्‍थान के मंत्रियों और केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में विभिन्‍न विषयों पर सहकारी संघ-वार की भावना के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से विचार-विमर्श किया गया और अगली बैठक राजस्‍थान में आयोजित करने के निर्णय के साथ बैठक समाप्‍त हुई।
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Friday, 12 May 2017

कैंसर के इलाज में गौमूत्र ने दिखाई नई राह... मिला अमेरिकी पेटेंट...

गौमूत्र आैर गौमूत्र अर्क का प्रयोग सदियों से होता आ रहा है 
                                                                                                           चित्र गोराष्ट्र से साभार 
💥#भारतीय ही भूल गए है अपनी गौ माता की महिमा दूसरी ओर #विदेशी #गौ_उत्पादक का रिसर्च करके बड़ी भारी मात्रा में उपयोग में लाकर लाभविन्त हो रहे है ।
वाटसअप ग्रुप से साभार 
💥#गौमूत्र आैर गौमूत्र अर्क का प्रयोग सदियों से जीर्ण #व्याधियों को ठीक करने में किया जा रहा है।  #खतरनाक रोग #कैंसर के उपचार के लिए दुनिया भर में शोध चल रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सफलता नही मिली है पर अब सदियों से इस्तेमाल हो रहे #गौमूत्र ने एक नई राह दिखाई है ।
💥#आयुर्वेद में प्राचीन काल से #गौमूत्र आैर पंचगव्य का विभिन्न रोगों को ठीक करने में उपयोग होता रहा है। गौमूत्र को आयुर्वेद में त्रिदोष(वात-पित-कफ) शामक माना गया है। सभी को खत्म करने की शक्ति गौमूत्र में है। गौमूत्र को प्राचीन ग्रंथ आैर आयुर्वेद के जानकार कैंसर ( जिसे पुराने आयुर्वेद के ग्रंथो में अबुर्द के नाम से जाना जाता था )के उपचार में कारगर मानते थे। अब धीरे धीरे #आयुर्वेद का यह मत #वैज्ञानिक कसौटी पर भी खरा उतरता नजर आ रहा है ।
💥गौ विज्ञान अनुसंधान #केंद्र द्वारा गाय के मूत्र से बनाई एक दवा को अमेरिकी पेटेंट हासिल हुआ है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कैंसर की इस दवा को अपने #एंटीजीनोटॉक्सिटी गुणों के कारण तीसरी बार यह #पेटेंट मिला है। गौमूत्र से बने अर्क को कामधेनु अर्क नाम दिया गया है। #नेशनलइन्वाइरनमेंटलइंजीनियर रिसर्चइंस्टिट्यूटनीरी और गौ_विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने इसे मिलकर तैयार किया है। नीरी के एक्टिंग डायरेक्टर तपन #चक्रवर्ती ने कामधेनु अर्क को पेटेंट मिलने की पुष्टि की है ।
💥#चक्रवर्ती ने बताया कि री #डिस्टिल्ड काउ यूरिन डिस्टिलेट का उपयोग जैविक तौर पर #नुकसानग्रस्त डीएनए को दुरस्त करने में किया जा सकता है। इस नुकसान से #कैंसर समेत कई बीमारियाँ भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि गौमूत्र से तैयार ये अर्क #जीनोटॉक्सिटी के खिलाफ काम करता है जो कोशिका के #आनुवांशिक पदार्थ को होने वाली नुकसानदायक क्रिया है। मानसिंघका ने बताया कि इसके लिए तीन #मरीजों पर शोध किया गया जिनमें से दो को गले और एक को #गर्भाशय का #कैंसर था। वो सही हो गया है ।
💥गौ मूत्र की महत्ता
💥1. कैसर रोधक #टेक्सोल पेव #टीटेक्सेल को #अमेरिका से पेटेन्ट भी कराया है जोकि #कैंसर रोधक है। 

💥2. रोम में #गौमूत्र की महत्ता इतनी अधिक बढ़ रही थी कि वहां गौमूत्र पर कर भी लगाने का वर्णन है। 

💥3. यूरोप के देशों में 18वीं शताब्दी में #गौमूत्र से पीलिया, गठिया, साइटिका, अस्थमा, धात , इन्फ्लूएजा आदि रोगों के निदान का विस्तृत वर्णन है। 

💥4. चीन में हर्बल औषधियों में गौमूत्र के सहपान का वर्णन है। 

💥5. #अमेरिका के #डाॅक्टर #क्राफोड हैमिल्टन के अनुसार गौमूत्र के प्रयोग से ह्रदय के रोग दूर होता है। कुछ दिन गौमूत्र सेवन से #रक्तचाप ठीक होता है, #भूख बढ़ती है तथा किडनी सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है। 

💥6. गौमूत्र रक्त में बहने वाले #कीटाणुओं का नाश करता है ।

💥8. गौमूत्र घावों की विशाक्तता को दूर करता है तथा #स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है गौमूत्र 100 से अधिक रोगों के पूर्ण निदान में प्रभावी है। 

💥9. गौमूत्र अर्क के #कैंसर रोधी गुण पर पेटेन्ट संख्या यू0एस0-6410056 प्राप्त हुआ है। 

💥10. गौमूत्र रक्त व विष की विकृति को हटाता है, बडी आंत में गति को शक्ति देता है, शरीर में वात पित व कफ #दोष को स्थिर रखने में सहयोग करता है। 

💥11. यह अनिच्छित व #अनावश्यक वसा को निर्मित होने से रोकता है, लाल रक्त कोशिकाओं एवं #होमेयोग्लोबिन के उत्पादन में सन्तुलन रखता है। 

💥12. यह जीवाणुनाशी व #मूत्रवर्धक होने से विष (टोक्सिन) को नष्ट करता है, मूत्र मार्ग से पथरी को हटाने में सहायक है, #रक्तशुद्धि करता है। 

💥13. यह तेजाब विहीन, वंशानुगत गठिया रोग से मुक्त करता है। आलस्य व मांसपोशियों की कमजोरी को हटाता है, कीटाणुनाशक, कीटाणु की #वृद्धि को रोकता है। (गेन्गरीन) मांस सड़ाव से रक्षा करता है। 

💥14. यह #रक्तशुद्धिकर्ता अस्थि में शक्ति प्रदाता (कीटाणुनाशक) रक्त में #तेजाबी अव्यवों को कम करता है । 

💥15. यह जीवन में शक्ति व उत्साह वृधन में #सक्रियता लाता है व मानसिक रूग्णता व प्यास से बचाता हैं अस्थि में पुनः शक्ति प्रदान कर जीवन में उमंग वृद्धि करते हुए पुनरोत्पादक शक्ति प्रदान करता है। 

💥16. यह रोग प्रतिरोधात्मक #शक्ति #वर्द्धक, हृदय को शक्ति व संतोष प्रदान करता है।

💥#भारतवासियों आप भी गौ उत्पादक की महत्ता समझकर उपयोग करके #स्वस्थ्य रहे और #गौ हत्या रोकने तथा देश को #समृद्ध बनाये रखने में सहभागी होइए ।

🚩आज से हम सभी संकल्प ले क़ि गाय माता को कत्लखाने जाने से बचाकर #गाय माता की रक्षा करेंगे ।

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Tuesday, 9 May 2017

भाजपा ने खोला वार्ड नंबर 30 में कार्यालय

परवीन बांसल ने किया औपचारिक उद्धघाटन 
लुधियाना: 9 मई 2017: (FIB मीडिया):: For More Pics on FB Please Click Here
जनता से अपने सम्पर्क को और मज़बूत करते हुए भारतीय जनता पार्टी अपना अभियान लगातार तेज़ कर रही है। इसी अभियान के अंतर्गत आज लुधियाना के वार्ड नंबर 30 में बीजेपी का कार्यालय खोला गया। इसकी औपचारिक रस्म वरिष्ठ भाजपा नेता परवीन बांसल ने अदा की। इस अवसर पर भाजपा के साथसाथ कुछ अकाली नेता और वर्कर भी मौजूद रहे। इस मौके पर भीड़ थी लेकिन न्यू कुंदनपुरी की आबादी के हिसाब से बहुत ही कम। चुनावी अभियान के समय श्री बांसल के साथ रहने वाले वोटर लोग इस मौके से दूर रहे। शायद चुनावी परिणामों के बाद उनकी सियासत भी बदल गयी हो। भाजपा के इस दफ्तर के ओपनिंग कार्यक्रम में वक्ताओं ने दावा किया है कि किसी को कोई भी समस्या हो वो बस एक आवेदन दे और यह कार्यालय उसकी समस्या दूर करने कराने का पूरा प्रयास करेगा।  श्री बांसल ने इस मौके पर इलाके के नाराज़ लोगों के गीले शिकवे भी सुने। इस सब के बावजूद श्री बांसल कुछ परेशान और उदास से दिखे। यह उदासी केवल थकावट की थी या कार्यालय में जुटी कम भीड़ या कोई और कारण--इसका जवाब प्रबंधक ही दे सकते हैं। सुधा खन्ना और कुछ अन्य लोग विशेष तौर पर शामिल हुए। For More Pics on FB Please Click Here
इस मौके पर अजय सौंधी, तेजिंदर राजा, जोगा सिंह, गोल्डी सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरचरण सिंह, कुलजिंदर बाजवा और कई अन्य भी मौजूद थे।
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वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों की समीक्षा बैठक

08-मई-2017 18:00 IST
केंद्रीय गृह मंत्री ने विकास के मुद्दों पर भी संबोधित किया 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज यहां वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। आज दोपहर के सत्र के दौरान विकास के मुद्दों पर दिए गए उनके भाषण का मूल पाठ इस प्रकार है:


भोजनावकाश के पश्चात के इस सत्र में मैं सर्वप्रथम इस बैठक में सम्मिलित हो रहे केंद्रीय मंत्रियों का स्वागत करना चाहता हूँ। इस महत्त्वपूर्ण बैठक के प्रथम सत्र में हमने इन areas में विभिन्न security issues के विषय में विस्तार से चर्चा की। हमने एक नई Doctrine, "समाधान" पर विस्तार से विचार विमर्श किया, जिसके निम्न आठ pillars हैं:


1.      S- Smart Leadership


2.      A- Aggressive Strategy


3.      M- Motivation and Training


4.      A- Actionable Intelligence


5.      D- Dashboard Based KPIs (Key Performance  Indicators)


6.      H- Harnessing Technology


7.      A- Action plan for each Theatre


8.      N- No access to Financing


2.       आप सभी सहमत होंगे कि सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के अलावा affected areas में सामाजिक- आर्थिक विकास तथा नागरिकों का सशक्तीकरण भी आवश्यक है ताकि जन-समर्थन सरकार के साथ रहे। सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति पर चलना सभी राज्यों के लिए आवश्यक है ताकि LWE affected areas की जनता का विश्वास प्रजातांत्रिक व्‍यवस्‍था के प्रति बना रहे।


3.       हमारी सरकार ने इस दृष्टिकोण से ऐसे अनेक प्रयास किए हैं, जिससे आदिवासी बहुल तथा LWE affected areas में सरकार के प्रति विश्वास जागा है और लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं।


4.       केन्द्र सरकार ने वर्ष-2014 में LWE से प्रभावित 10 राज्यों में 3567.58 करोड़ रुपये की लागत से 2199 मोबाइल टावर स्थापित करने की योजना को स्वीकृति दी है। इसमें से 2187 मोबाइल टॉवर operation में आ गए हैं। यह अच्छी उपलब्धि है।


5.       केन्द्र सरकार के द्वारा 8 प्रदेशों के LWE प्रभावित 34 जिलों में सड़क व्यवस्था को सुधारने के लिए Road Requirement Plan (RRP) implement किया जा रहा है। इस योजना में स्वीकृत 5422 किमी में से 4290 किमी सड़कों का निर्माण हो चुका है।


6.       अभी हाल में केन्द्र सरकार द्वारा Road Connectivity Project for LWE Affected Areas Scheme को स्वीकृति दी गई है। इसमें LWE प्रभावित 9 राज्यों के 44 जिलों में 11725 करोड़ रुपये की लागत से 5412 किमी सड़क एवं 126 पुलों का निर्माण किया जाना है।


7.       Financial Inclusion की दिशा में विशेष प्रयास कर पिछले दो वित्तीय वर्षों में 35 LWE most affected districts में 358 बैंक शाखाएं तथा 752 ATM खोले गए हैं। इन्हीं जिलों में 1789 नए डाकघर खोलने की अनुमति दी गई है।


8.       LWE Districts के युवाओं को स्वरोजगार हेतु PMKVY के तहत युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाना है। वर्तमान में इस योजना में 35 Most LWE affected Districts में से 32 districts covered हैं।


9.       9 राज्यों के LWE प्रभावित जिलों के युवाओं में Skill development हेतु कौशल विकास केन्द्रो की स्थापना के उद्देश्य से Skill Development Scheme का कार्यान्वयन किया जा रहा है। अब इस योजना को 34 से बढाकर 47 LWE प्रभावित जिलों में Implement किया जा रहा है। अब इस योजना में कुल 47 ITIs तथा 64 Skill Development Centre बनाए जाने हैं। इनमें से 12 ITIs एवं 34 Skill Development Centres का निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है।


10.     दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) के अन्तर्गत Un-electrified गॉवों का Electrification किया जाना है। LWE Districts में स्थित गॉवों के समुचित विकास हेतु इनके Electrification पर Special focus रखते हुए 31 मार्च 2015 से अब तक कुल 5778 गॉवों का Electrification किया जा चुका है तथा बाकी 1461 गॉवों के Electrification के लिए दिसम्बर-2017 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


11.     LWE affected districts में शिक्षा हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत 5 Districts जिनमें अब तक कोई जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं है, में नए जवाहर नवोदय विद्यालय खोले जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 11 LWE most affected districts में जहाँ अभी कोई केन्द्रीय विद्यालय नहीं है, में केन्द्रीय विद्यालय खोलने की योजना है जिसमें से 08 जिलों के प्रस्ताव स्वीकृत कर दिए गए हैं तथा विद्यालय खोलने का कार्य प्रारंभ हो चुका है।


12.     राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत 35 LWE most affected जिलों के 354 Educationally Backward Blocks में 348 छात्रावासों को बनाने की मंजूरी दी गई है, जिसमें से 100 छात्रावास बन चुके हैं तथा 82 छात्रावासों का कार्य प्रगति पर है। अब तक 94 छात्रावास चालू भी कर दिए गए हैं।


13.     LWE affected areas में Rail connectivity को बढ़ाने के लिए केन्द्र ने कई परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, उनमें से कई परियोजनाओं की प्रगति सराहनीय है। किन्तु land acquisition न होने के कारण कई परियोजनाए रूकी हुई हैं। मैं चाहूंगा कि इनकी land acquisition संबंधित समस्याओं का शीघ्र निवारण किया जाए ताकि project शीघ्र पूर्ण हो सके।


14.     मैं राज्‍य सरकारों को यह भी सुझाव देना चाहूँगा कि केन्‍द्र की योजनाओं के साथ-साथ राज्‍य सरकारें अपनी योजनाओं के माध्‍यम से इन्‍हें  complement करें, Top-up करें। इससे LWE प्रभावित क्षेत्रों का समेकित विकास हो सकेगा और माननीय प्रधानमंत्री जी का ''सबका साथ, सबका विकास'' का सपना साकार हो सकेगा।
           जय हिन्‍द!
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