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Saturday, 10 October 2020

जिन्होंने भारत को सफलता की शिखरों तक पहुंचाया

 आज फिर ज़रूरत है लाल बहादुर शास्त्री और अब्दुल कलाम की 


लुधिययाना
: 9 अक्टूबर 2020: (डा.भारत//FIB media)::
भारत भूमि कभी भी वीरों से खाली नहीं रही है, समय समय पर प्रकृति इश्वरी शक्तियों ने एक से एक धुरन्दर वीर पैदा किया है। इन्ही में हम आज़ाद भारत में कुछ महान सख्शियतों का नाम लेना चाहेंगे, वैसे तो पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी जी जैसे कर्मवीरों की बाद के लेख में लिखना चाहेंगे, परन्तु इतनी वक्त हम मिसाइल मैन के नाम से विश्व विख्यात जिनके प्रयाश से जहाँ हम मंगल ग्रह तक पहुँच सके वहीँ सामरिक शक्ति से रूस अमेरिका के बराबर तक पहुंचा दिया वह रहे हैं पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे . अब्दुल कलाम जी। दुसरे  है जय जवान, जय किसान के नाम से विश्व विख्यात जिन्होंने अपने कर्तव्य अपनी विचारधारा अपने कर्मों से सेना के जवानों को नया जोश नई शक्ति वह उमंग भरा की 1965 के भारत पाक युद्ध में अमेरिका का सबसे शक्तिशाली अजेय माना जाने वाला  पैटन टैंक की धज्जिया उड़ाकर टैंकों का  कब्रिस्तान बना दिया वे महान हस्ती रहे हैं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री, जिनकी देश के प्रति देशभक्ति की आनेवाले पीढ़ी जनरेशन शदियों तक सैलूटे करती रहेगी।

       आज के मौजूदा समय में जिस तरह से  देश के हालत पैदा हो चुके हैं की हम थोड़े से शब्दों में व्याख्या नहीं कर सकते। प्रत्यक्ष देखा जा सकता है की आज शिक्षक दुखी, आज सरकारी कर्मचारी दुखी, आज  किसान दुखी आज व्यापारी दुखी,  आज मजदूर दुखी, आज छोटे मोटे काम धंधे करने वाले दुखी , कौन है जो सुख चैन से समय व्यतीत जिनके दिमांग में कट्टरता भर गई हो चाप्लूस जैसे लोग ही सुखी होने का दिखावा करके के की देखो हम  कैसा जीवन जी रहे हैं ? सिर्फ दिखावे के लिए। आज  ऊंच नीच के भेद भाव से कहीं खुलेआम गरीब तबकों  पीटा  जा रहा है। 
जातिवाद,सम्प्रदायवाद,नफरत्वाद,पापाचार, अत्याचार, लूटखसोट,  हत्या बलात्कार, छोटी बच्चियों से बलात्कार, शरेआम गुंडई, हुड़दंग, जैसे अनेकानेक अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं, देश के अधिकांश प्रदेशों के  हर तरफ हर कोई आम जनता डर-भय-शंका, से पीड़ित होती नजर आ रही है? आखिर कौन है इन सब का जिम्मेदार शासन नाम की कोई चीज रह ही नहीं गई , हर तरफ मनमानी, न्याय के लिए भटकते लोग? आगे कुछ सूचनाएं ऐसी हैं कि अगर शासन प्रशासन, और जनता तीनो को मिलकर राष्ट्र हित में कोई न कोई सार्थक कदम पर एक जुट एक राय होकर साथ चलना पड़ेगा, सबसे अति महत्वपूर्ण जो है की इतनी वक्त सभी राजनितिक पार्टियों दलों को देश की सुरक्षा देश की एकता अखंडता के लिए एक राय एक मत से पहले देश की इन आनेवाले खतरों के प्रति सतर्क होकर देश को सभालना जरुरी ही नहीं अति से अति जरुरी हो गया है, बाद में अपने राजनितिक ड्रामा करते राहों वार्ना वक्त और इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा।     
फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो को कुछ ऐसी सूचनाएं सुनने को  मिली हैं  की? चर्चा तो यहाँ तक है कि  देश के कुछ  तथाकथित राजनितिक देश में दंगा कराकर फौजी शासन लागु कराना चाहते है तांकि अब तक बेदाग़ भारतीय सेना पर भी दाग लग जाये देश ईरान इराक ,अफगानिस्तान से भी गया गुजरा हो जाये? इस लिए हमें  देश के प्रति समर्पित महामहिम डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रपति और कर्मवीर स्वर्गीय प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जैसे महान हस्तियों की जरुरत है क्यूंकि पिछले दिनों ही सरकार के मंत्री लोगों ने राज्य सभा में जानकारी दी  के १२ राज्यों में विश्व के खूंखार आतंकी संगठन आई एस आई एस अपने अड्डे कायम कर चुका है। इसलिए न तो हम सुरक्षित  ही देश सुरक्षित है।  याद रखें यह भी एक सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता जब जब मानव असहाय हुआ है तब तब कोई नयी शक्ति ईश्वर ने पैदा की है।  
       कहते हैं कि परिवर्तन ही प्राकृति का नियम है, जब जब इस धरा पर हद से ज्यादा स्वार्थी , फरेबी, झूठ पापाचार, अत्याचार , हत्या बलात्कार जैसे जघन्य अपराध बढ़ने लगता है, और शासन मनमानियां करने लगती हैं  तब तब जीव मानव की रक्षा के लिए प्रकृति ईश्वरीय शक्तियों को किसी न किसी रूप में अपनी ताकत  दिखानी पड़ती है।  

Friday, 2 June 2017

सैनिकों का कल्याण//विशेष लेख//*रंजीत कुमार


18-मई-2017 13:22 IST
सैनिकों की भलाई के लिए उठाये गए कदमों की विशेष चर्चा 
रंजीत कुमार  
मशीन के पीछे जो इंसान है वह भी पूरी तरह से तंदुरुस्त और सुविधा संपन्न होना चाहिए। पिछले तीन वर्षों के दौरान एनडीए सरकार का यह मिशन रहा है। जब लाखों डॉलर की लागत से हथियार प्रणालियों और विभिन्न उपकरणों को खरीदा जाता है, तो सेना के जवान और अधिकारी इनकी बेहतर तरीके से देखभाल करते हैं, ताकि युद्ध के समय इनका प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल किया जा सके। ऐसे में इन जवानों और अधिकारियों का भी तंदुरुस्त एवं सुविधा संपन्न होना जरूरी है। एनडीए सरकार ने सत्ता संभालने के बाद, न केवल सैनिकों के भुगतान एवं भत्तों तथा पेंशन में बढ़ोतरी की घोषणा की है, बल्कि उनके जीवन को आसान बनाने के लिए कई कारगर कदम भी उठाए हैं। देश तब तक युद्ध नहीं जीत सकता, जब तक युद्ध लड़ने वाले सैनिकों को उनके कल्याण के लिए आश्वस्त न किया जाए। एक असंतुष्ट सैनिक से देश के लिए बलिदान देने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए एनडीए सरकार सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने और उनके कल्याण के बारे में बातें कर रही है और इस दिशा में कई कारगर कदम भी उठा रही है।

सैनिकों के कल्याण की दिशा में उठाए गए प्रभावशाली कदमों में से एक वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को स्वीकार किया जाना है। देश के सैनिक पिछले चार दशकों से वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे थे। सरकार ने 07 नवंबर 2015 को वन रैंक वन पेंशन को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लागू करने की घोषणा कर दी। इसके लागू होने से सरकारी ख़जाने से प्रतिवर्ष करीब 8000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वन रैंक वन पेंशन ने रक्षा सेवा के सैनिकों के बीच पेंशन को लेकर व्याप्त असमानताओं और अस्थिरताओं में सुधार सुनिश्चित किया है। पिछले वर्ष 30 नवंबर तक, पहली किश्त और एकमुश्त भुगतान के तहत 19,64,350 सैनिकों को 3,985.65 करोड़ रुपयों का भुगतान किया जा चुका है। दूसरी किश्त में 15,46,857 सैनिकों को 2281.63 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया।

इसके अलावा सरकार ने 3 मई, 2017 को 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर अधिसूचित कर दिया। इससे सेवा कर्मियों के वेतन और भत्तों में भारी वृद्धि होगी। आयोग ने पहली बार, सभी सैन्य कर्मियों के सैन्य सेवा वेतन (एमएसपी) में काफी अधिक वृद्ध की है और उच्च जोखिम वाली स्थिति में तैनात नौसेना और वायुसेना के जवानों को विशेष भत्ते दिए जाने की अनुशंसा की गई है।

सेवारत और सेवानिवृत्त लाखों सैनिकों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में अधिक पॉलिक्लिनिक और रेफरल अस्पतालों की शुरुआत कर कर्मचारी अंशदान स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) का दायरा बढ़ाया है। सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए कई प्रभावी कदम कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा सुधारों के क्रम में सेवानिवृत्त अंशदान स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) को पूर्ण रूप से डिजिटल किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत कुल 50 लाख लाभार्थी शामिल हैं। फिलहाल इस योजना को 28 क्षेत्रीय केन्द्रों और 426 पॉलिक्लिनिकों के जरिए चलाया जा रहा है। ईसीएचएस लाभार्थियों को नकदरहित उपचार की सुविधा मुहैया कराने के लिए कुल 1445 सिविल अस्पतालों को इस योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है।

महिलाओं को सशक्त करने और उनके कल्याण के मद्देनज़र, सरकार ने लड़ाकू टुकड़ियों में महिलाओं को शामिल करने को मंज़ूरी दी है, ताकि उन्हें भारतीय वायुसेना की सभी शाखाओं और धाराओं में शामिल होने के लिए योग्य बनाया जाए। इस योजना के तहत महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष समरूप समान मानदंडों के अनुसार चुना जा रहा है। इसके अलावा, समरूप समान मानदंडों को स्थायी कमिशन प्रदान करने के लिए महिलाएं एवं शॉर्ट सर्विस कमिशन दोनों तरह के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लागू किया गया है। 18 जून 2016 भारत की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन था, क्योंकि इस दिन तीन महिला लड़ाकू पायलटों को डूंडीगल में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। इसके साथ ही, भारती उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया था, जिनके पास महिला लड़ाकु पायलट हैं।

प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के तहत, सेना कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया और संचार नेटवर्क को पूरी तरह से डिजिटल किया जा चुका है। एक विशेष सॉफ्टवेयर प्रणाली – आर्मी रिकॉर्ड ऑफिसर प्रोसेस ऑटोमेशन (एआरपीएएन) 2.0 भी शुरू किया गया है। इस सॉफ्टवेयर ने 12 लाख से अधिक जूनियर कमिशन अधिकारियों और जवानों को अपने सर्विस रिकॉर्ड और नौकरी से संबंधित विभिन्न जानकारियां ऑनलाइन प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

01 जुलाई 2015 से सेना की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा चुका है। अधिकारियों, जेसीओ और अन्य अधिकारी एवं कर्मियों के चयन के लिए भर्ती महानिदेशालय की एक नई वेबसाइट की शुरुआत की गई है। अब देशभर के उम्मीदवार इस वेबसाइट पर जाकर, सेना में रोज़गार एवं करियर के विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उपयुक्त विकल्प का चयन कर उसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

सेना के दिग्गजों को बेहतर और व्यापक देखभाल प्रदान करने के लिए सेना ने 14 जनवरी, 2016 को दिल्ली कैंट में डायरेक्टरेट ऑफ इंडियन आर्मी वेटरन्स की स्थापना की। यह निदेशालय सेना के दिग्गजों को वयोवृद्ध देखभाल और सहायता सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करेगा। इसके साथ ही यह निदेशालय सेना के दिग्गजों, उनकी विधवाओं और परिजनों की शिकायतों और समस्याओं का एक ही स्थान पर समाधान प्रदान करने वाली एक संस्था के तौर पर कार्य करेगा। इस नए निदेशालय का उद्घाटन काफी धूमधाम से उत्साह के साथ किया गया।

सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए, रक्षा मंत्रालय ने 22 अगस्त 2016 को पायलट परियोजना के तौर पर एक आर्मी कौशल प्रशिक्षण केन्द्र (एएसटीसी) भी स्थापित किया। इस केन्द्र की स्थापना के साथ ही, सैनिकों के जीवनसाथी और उनके परिवारजनों को कौशल विकास की धारा में जोड़डकर भारतीय सेना ने एक नए मिशन की शुरुआत की है। एएसटीसी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सैनिकों के जीवनसाथी और उनके परिवार के सदस्यों को एनएसडीसी की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे और ये सभी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत रोज़गार पाने अथवा ख़ुद का उद्योग स्थापित करने के लिए योग्य होंगे।

दूरदराज, ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने के दौरान अपने परिवार से लंबे समय तक दूर रहने और कठिनाइयों का सामना करने जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर विवाहित आवास परियोजना (एमएपी) में तेजी लाने के लिए कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत अपनी तैनाती के स्थान पर कार्यरत विवाहित जवानों को करीब 2,00,000 आवासों की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। एमएपी के तीसरे और अंतिम चरण के अंतर्गत करीब 71,000 आवास इकाइयां उपलब्ध कराने की योजना कार्यान्वयन के अंतर्गत आगे बढ़ रही है। (PIB) 
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*लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।  
लेख में व्‍यक्‍त विचार लेखक के अपने हैं।

Sunday, 30 April 2017

आतंकवाद महामारी का रूप ले चुका है : उपराष्‍ट्रपति

29-अप्रैल-2017 19:20 IST
दो देशों के दौरे से लौटते समय विशेष विमान में मीडिया को संबोधन 
नई दिल्ली: 29 अप्रैल 2017: (पीआईबी)::
उपराष्‍ट्रपति श्री एम.हामिद अंसारी ने कहा कि आतंकवाद महामारी का रूप ले चुका है और प्रत्‍येक समाज को प्रभावित कर रहा है। वे पांच दिन की आर्मिनिया और पोलैंड यात्रा से लौटते समय एयर इंडिया-वन विशेष विमान में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूक्ष्‍म, लघु और मझोले उद्यम राज्‍य मंत्री श्री गिरिराज सिंह व अन्‍य विशिष्‍ट व्‍यक्ति भी मौजूद थे। 

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि आर्मिनिया और पोलैंड दोनों ही मित्र देश हैं और हम आपसी सहयोग में नये सिरे से दिलचस्‍पी उत्‍पन्‍न करने में सक्षम रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि आर्मिनिया हालांकि छोटा सा देश है, लेकिन वह परंपरागत रूप से हमारा अभिन्‍न मित्र रहा है।

पोलैंड का हवाला देते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वह मध्‍य यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है और हम उसके साथ व्‍यापार बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि पोलैंड में भारतीय निवेश और भारत में पोलैंड की ओर से निवेश किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि पोलैंड के राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के साथ बातचीत के दौरान हमने कुछ विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की है,  जहां दोनों देशों के बीच सहयोग या तो शुरू हो रहा है या फिर बहुत जल्‍द शुरू हो सकता है।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍होंने पोलैंड के नेताओं को सुझाव दिया है कि वे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के साथ जुड़ें और केवल विक्रेता बनने के स्‍थान पर भारत आधारित विक्रेता बने, जिससे उन्‍हें अतिरिक्‍त लाभ मिलेंगे। उन्‍होंने कहा कि पोलैंड ने इस सुझाव पर सकारात्‍मक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने कहा कि विचार-विमर्श बहुत ही केंद्रित और सकारात्‍मक रहा और इसके निष्‍कर्ष भी संतोषजनक रहे।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि पोलैंड ने एशिया के कुछ बाजारों की पहचान प्राथमिकता वाले बाजारों के रूप में की है और भारत उन्‍हीं में से एक है। उन्‍होंने कहा कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह की पहल किए जाने की अपेक्षा है।

आर्मिनियाई नवाचार के साथ संभावनाओं का पता लगाने और परस्‍पर लाभ के लिए भारतीय प्रयासों के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के उत्‍तर में उन्‍होंने कहा कि आर्मिनियाई नवाचार अच्‍छा है और भारत के प्रयास सही दिशा में है।
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