Tuesday, 12 June 2018

देखते हैं कौन करता है धक्केशाही--गरजे मनप्रीत अयाली

बेइंसाफी न रुकी तो संघर्ष और तीखा-बडुंदी में अकालीदल का धरना

लुधियाना: 11 जून 2018 (FIB मीडिया के लिए ह्रदय राम की रिपोर्ट):: 
अकालीदल फिर अपने जुझारू रंग में है। कांग्रेस सरकार की तरफ से की गयी कथित धक्केशाही के खिलाफ अकालीदल ने उग्र लेकिन रोषपूर्ण धरना दिया। यह धक्केशाही गुरुशरण सिंह बडुंदी के साथ सरपंची के चुनाव को लेकर की गयी। सत्ता कैसे कैसे घिनौने खेल खेलती है इसकी एक झलक दिखती है यह धक्केशाही। इसके खिलाफ बहुत से सीनियर अकाली लीडर एकजुट हुए। पूर्व विधायक मनप्रीत अयाली ने अकाली कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट कहा-किसकी हिम्मत है जो हमारे साथ धक्केशाही कर जाये। हम इस तरह की गुंडागर्दी से नहीं डरते। जोशीली ललकार के अंदाज़ में यह बात कही पूर्व अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने।

वह पक्खोवाल के नज़दीक लुधियाना के ही गाँव बडुंदी में आए हुए थे। यहाँ अकाली दल के रोष धरने को सम्बोधित करते हुए उन्होंने अकाली कार्यकर्ताओं में  एक नया जोश भर दिया। उन्होंने स्पष्ट एलान किया कि काम से कम कम दस लोग भी डांग पकड़ कर तैयार बैठे हों तो किसकी मजाल है जो अकाली शक्ति के सामने ठहर जाए। उन्होंने याद दिलाई की अकाली दल का इतिहास मोर्चों और संघर्षों का इतिहास है। जेल में रहें या बाहर--हमें कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता। इस मौके पर वृद्ध और टकसाली अकाली कार्यकर्ता भी शामिल थे। दोपहर की कड़कती धुप के बावजूद यह धरना सफल रहा। इसकी सफलता ने संकेत दिया कि अकालीदल फिर नई पारी के लिए तैयार है। 
सरपंची के चुनाव में हुई कथित धांधली के मुद्दे को लेकर गांव बडुंदी में यह धरना दिया गया था। यह कथित धक्केशाही सरपंची के चुनाव में गुरशरण सिंह बडुंदी के साथ की गयी। श्री अयाली ने याद दिलाया की अकाली दल की तो जीवन शैली ही संघर्षों से भरी है। हमने अनगिनत मोर्चे लगाए और जीत हासिल की। हम आज भी उसी तरह मज़बूत हैं। किसी ने हमें कमज़ोर समझ कर धक्केशाही की तो नतीजे अच्छे नहीं होंगें। गौरतलब है की इस धरने में बच्चों से ले कर बज़ुर्ग लोग भी जोशो खरोश के साथ शामिल हुए। दोपहर की कड़कती धुप में भी न तो किसी के चेहरे पर कोई घबराहट थी और न ही चिंता। सभी के चेहरों पर जोश की चमक थी। इस मौके पर सरपंची चुनाव में हुई धक्केशाही के साथ साथ 2019 और 2022  के चुनावों की जीत का भी संकल्प दोहराया गया। लगता था इस धक्केशाही ने अकालीदल को अपना चुनाव अभियान अभी से चलने का मौका प्रदान कर दिया। 
धरना जोशीला लेकिन शांतिपूर्ण था। किसी भी वर्कर ने मंच से आये इशारे के बिना एक नारा तक भी नहीं लगाया। इस अवसर पर पानी और चाय का पूरा प्रबंध था। सब कुछ बहुत ही अनुशासित ढंग से चल रहा था। कोई भी अकाली नेता अपने निश्चित समय से ज़्यादा नहीं बोला। सभी ने अपने अपने ढंग से इस मुद्दे पर चर्चा की। तकरीबन सभी वक्ताओं इ भाषण इन चेतावनी की सुर स्पष्ट थी। कांग्रेस पार्टी के साथ साथ उन उच्च अधिकारीयों को भी याद दिलाया जा रहा था की अगर उन्होंने नियमों से हट कर कुछ किया तो अकाली सरकार आने पर उन्हें इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। यह चेतावनी बहुत ही गंभीरता से दोहराई गयी।  
इस मौके  पर लोकसभा के पूर्व स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल के कहने पर सभी कार्यकर्ता श्रद्धा और शांति से मूलमंत्र का जाप करते रहे। श्री अटवाल ने कहा की हम इसी तरह एक सप्ताह तक शांतिपूर्ण संघर्ष करेंगे। अगर प्रशासन को समझ नहीं आई तो फिर बड़ा एक्शन भी किया जायेगा। वक्ताओं ने कहा की सरपंच गुरुशरण सिंह के साथ की गयी धक्केशाही कोई मामूली बात नहीं है। आज अगर इसे सहन कर लिया गया तो फिर कांग्रेस सरकार के हाथ और खुल जायेंगे। अन्य लोगों के साथ भी यही होगा। इस लिए हम इसे यहीं रोकेंगे। हम सरकार की इस धक्केशाही को बढ़ने नहीं देंगें। इस अवसर पर अकाली वर्करों का जोश देखने वाला था। 
पंचायती चुनाव की धांधली के खिलाफ आयोजित इस धरने में सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। इस अवसर महिलाओं ने भी बढ़ चढ़  कर भाग लिया। इन महिलाओं में जहाँ अकाली कार्यकर्ताओं और सरपंचों के परिवारों की संभ्रांत महिलाएं थीं वहीँ गाँव की वृद्ध औरतें भी बढ़चढ़ कर शामिल हुईं। इन महिलाओं ने इस धक्केशाही के खिलाफ ज़ोरदार स्यापा भी किया। पुतलों को जूते मारे और आग लगाई। जब पुतलों का सर फुट गया तो बहुत हास्यास्पद माहौल बना। यह सिर मिटटी के छोटे मटकों के बने हुए थे।  
छोटे बड़े सभी अकाली इस मौके पर हाज़िर रहे। गर्मी से घबरा कर एक भी वर्कर इधर उधर नहीं हुआ। इस धरने में लोकसभा के पूर्व स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल, पूर्व विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, वरिष्ठ अकाली नेता दर्शन सिंह शिवालिक, रंजीत सिंह तलवंडी और पीड़ित सरपंच गुरुशरण सिंह सहित बहुत से अकाली नेता शामिल थे। 

Saturday, 9 June 2018

भारतीय संविधान और भारत देश की संक्षिप्त जानकारी।


डॉ  .  भीमराव अम्बेडकर   किसी एक जाति  के लिए नहीं पुरे भारत वर्ष के प्रेरणा दायक , श्रद्धा के पात्र हैं। 
  Dr. Bharat : Director F.I.B. Media Intelligence 

  क्या आज़ाद भारत के लिए जिस संविधान का निर्माण हुआ देश के लोग उसका कितना पालन कर रहे हैं ? 
नेता से लेकर अभिनेता तक , स्वाभिमान से लेकर ईमान तक , धर्मनीतिग्य से लेकर राजनीतिग्य तक , संतरी से लेकर मंत्री तक , शासन  लेकर प्रशासन तक , ग्राम सभा से लेकर विधानसभा तक, राजयसभा से लेकर लोकसभा तक , न्याय मंत्री से लेकर न्यायलय तक  हर तरफ संविधान की धज्जियाँ उड़ रही है।  और हम लोग जातिवाद , नक्सलवाद , सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद , बड़ी जाती से लेकर छोटी जाति तक  नफरतवाद के चक्कर में खुद अपना घर अपना वतन का बेड़ागर्क कर रहे हैं, तो क्या हम अपने आपको एक इस देश का सच्चा नागरिक सच्चे देश भक्त कहलाने के  हकदार हैं ? याद रखें  देश सलामत है तो आप और आपका परिवार आपका धर्म सलामत है। वर्ना  प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरुरत नहीं होती , ईरान , इराक ,सीरिया  , जार्डन ,अफगानिस्तान जैसे मुल्कों को देख कर शिक्षा ले वार्ना कहावत प्रसिद्ध है की धोबी का.....  न घर का न घाट  का ?   इतनी वक्त न हिंदू धर्म खतरे में है , न मुस्लिम धर्म खतरे मै है , न सिख  न ईसाई खतरे में है  अगर खतरे में है तो अपना वतन भारत देश खतरे में है। 
       लुधियाना  : प्रस्तुति  >  ह्रदय राम - FIB Media  : मौजूदा समय में भारत  देश  का क्षेत्र फल लगभग 32  लाख 87  हजार  265  किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। विश्व का 2.42 प्रतिशत जमीनी हिस्सा है और विश्व का सातवां बड़ा देश है। भारत में 49  हजार से ज्यादा पेड़ पौधों   और    81  हजार 251   जानवरों की प्रजातियां पेयी जाती हैं।  
        जिस संविधान के छत्र छाया में हम रहते हैं  उसकी जानकारी  जिसे हर भारतीय नागरिक को जानना जरुरी है। 
             1 :   भारतीय संविधान के लिए पहली संवैधानिक सभा की बैठक  9 दिसम्बर  1946  को हुयी थी। 
            2 :   भारतीय संविधान का अधिनियम 1947  में लागू किया गया।            3  :   राष्ट्रीय झंडे को 22 -07 - 1947  को  हुयी संवैधानिक सभा  में स्वकृति  प्रदान की गयी। 
         4  : यह जाहिर है की भारतीय संविधान  के निर्माण में  डाक्टर  भीम राव अम्बेडकर  जी का उल्लेखनीय योगदान है। 
         5 : 1947  में देश के  विभाजन के बाद संविधान सभा प्रभुत्व संम्पन 
हो गयी  जिसके अध्यक्ष डाक्टर राजेंदर प्रसाद जी थे।   
        6 :    भारत की जनता की तरफ से   26  जनवरी  1947 के समय भारत की स्वतंत्रता  के प्रतीक  संविधान कोको स्वविकार किया  और 26  जनवरी  1950  को लागु किया गया। 
        7  :    भारत के संविधान के निर्माण  ( पूरा करने )में   2  वर्ष  11 महीने  और  18  दिन का समय लगा था । 
       8  :  भारत के संविधान को  22  भागों  व 12  अनसूचियों   बाटा  गया। 
       9  :   संविधान को तैयार करने  में  प्रथम  संवैधानिक सभा के  अध्यक्ष  डाक्टर   राजेंदर प्रसाद को नियुक्त किया गया था। 
       10  : बाद में संविधान के प्रारूप समिति  के अध्यक्ष  डॉक्टर  भीम राव  आंबेडकर  जी  को नियुक्त किया गया।  
      11  :  संविधान को पूर्ण करने में देश  के कोने कोने से  381  विद्वान्  प्रतिनिधियों  ने  अपना  बहुमूल्य योग्यदान दिया है। 

      12  :  याद रखने योग्य जो जरुरी है भारतीय संसदीय शासन  प्रणाली  ब्रिटिश  ली गयी , मौलिक अधिकार  संयुक्त राज्य अमेरिका से , नीति - निदेशक तत्व आयरलैंड से , संघवाद ,प्रस्तावना ,भाषा  ऑस्ट्रेलिया  से ,  आपातकाल में  अधिकारों स्थगन जर्मनी से ,  गणतंत्र की    स्थापना  फ्रांस से ,   और संविधान संसोधन  की प्रणाली  दक्षिण अफ्रीका से ली गयी , इस प्रकार विदेशी  कानून से लिया सहयोग से  तब   हमारा  भारत का संविधान पूर्ण हुआ।  हमें डॉ. भीम राव आंबेडकर जी के साथ साथ  देश के  उन 381 विद्वानों  का भी सम्मान करना चाहिए जिन लोगों ने  रातदिन अथक प्रयास कर संविधान को पूर्ण करने में अपना योगदान दिया। 

Sunday, 3 June 2018

देश को बढ़ने में तीन की शान ,फौजी ,मजदुर और किसान।

आज मजदुर दुखी, आज किसान दुखी, कहीं फौजी  जवान  दुखी , इन सबका  कौन है जिम्मेदार ?     
Dr. Bharat :- First Investigation Bureau  ::-  Media Intelligence Service 
आज पूरे देश में जिस तरह के हालात है ऐसे हालत आज़ाद भारत में कभी नहीं देखे गए। अगर कोई सुखी हैं तो या तो भ्रष्ट नौकरशाही , या तो  कुछ पूंजीपति धनाढ्य , या तो सड़ीगली राजनीतिक नेता राजनीत करने वाले जो सरेआम देश के साथ बलात्कार कर रहे हैं।
      हम पुरे देश की स्थिति पर विचार  बाद में  करेंगे  इतनी वक्त सिर्फ पंजाब के किसानो की हालत पर ही बात कही जाएगी।  पंजाब में 35 लाख 55 हजार रेजिस्टर्ड किसान हैं जिसमें 11 लाख के करीब वह किसान हैं जिन्हे गरीबी रेखा से नीचे माना  गया है। अन्य जो  छोटे मोटे  जो अपने लिए ही सब्जी आनाज पैदा करते हैं वह अलग हैं। पिछले 5 सालो में ही  4400  किसान जीवन के जद्दोजेहद में जिंदगी  जंग हार चुके हैं।  कर्ज और परेशानी की बोझ से 2010  से लेकर 2017  तक 5591  किसानों ने अपनी जान देदी।  
गरीब    रोटी ,कपडा और मकान के लिए जद्दो जिहाद में दुखी परेशांन  , फौजी कभी खाने के लिए  कभी सामरिक साजोसामान होते हुए पत्थर की मार से दुखी  परेशांन  , किसान अपने खेत खलिहान की मार से दुखी परेशान।  अगर सुखी कोई है तो वो हैं राजनितिक मंत्री नेता जैसे लोग , मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ और सरकारी आंकड़ों  के मुताबिक राजनितिक नेताओं की जायदाद  रकम 252  % प्रतिसत तक बढ़ी है। 
     राणा की सम्पति रकम 100  करोड़ से ज्यादा बढ़ी है , जहाँ  राणा गुरजीत सिंह की 2012 , में 68  करोड़  48  से थोड़ा ऊपर थी  वहीँ 2017  इतना इजाफा हुआ की  ?  148  % प्रतिसत बढ़कर 169  करोड़  89 लाख  60  हजार रूपए हो गयी  ? ।    >  सुन्दर शाम अरोड़ा  जी की  सम्पति  2012  में....  21 करोड़  76  लाख 84  हजार थी , वहीँ 2017  में बढ़कर  105  % प्रतिसत की बढ़ोतरी हुयी  यानि की 44  करोड़  60  लाख  75  हजार रुपये हो गयी  ?.। 
     सुनील झाखड़ की  2012 ...  में 6  करोड़  ८४  लाख 6753  रूपये थी वहीँ  2017  में  252  % प्रतिसत की बढ़ोतरी होकर    24  करोड़  5  लाख  36 ,788  रुपये की बढ़ोतरी  हुयी  ? ,
     विक्रम मजीठिया  जी की  संपत्ति  जहाँ  2012 ...  में 11  करोड़  21  लाख  18 हजार 806  रुपये  थी।  वहीँ  2017  में   125  % प्रतिसत  बढ़कर 25  करोड़ 22  लाख  80  हजार 202  रुपये  हो गयी ,    यह सब तो घोषित  सम्पति है  अघोषित परदे के पीछे कितनी अवैध सम्पत्ति हैं  वह तो गोपनीय ही रहेगी ।  यही हाल हर राजनितिक  MP, MLA   की मानी जा सकती है। 
       सवाल यही उठता है कि  देश की हर राह हर मुश्किल  को आसान करने वाले  खून पसीना बहा कर  बड़ी बड़ी गगन चुम्बी इमारते  खड़ी करने वाले , बड़े बड़े  पुल  दुरूह सड़के बी बनाने वाले खेतों में खून पसीना एक करने वाले हर छोटे बड़े काम करने वाले  मजदुर  दर -दर  की ठोकरे खाकर  टूटे फूटे कच्चे मकानों में सर्दी गर्मी झेलकर जीवन  गुजारने को  भूखे रहने को  भूखे मरने को मजबूर  बिमारी में बिना दवा के तड़पने  और मरने को मजबूर। 
        दूसरी तरफ पुरे देश में  कोई ही किसान होगा जो खुश हाल होगा  वरना  ज्यादातर किसान कहीं न कहीं  कर्ज में डूबा हुआ है।   सरकारी आकंड़ो के मुताबिक पंजाब के हर किसान पर   सात  (7 ) लाख से ज्यादा कर्ज चढ़ा हुआ है।  ऐसे ही हाल लगभग पुरे देश के किसानो का है।  
      रह गयी  फौजी जवानो की परेशानियां  आए दिन कोई न कोई   शोशल मीडिया पर  कोई विडिओ  वायरल होती है ?  +  ?. .  की दहशत गर्दी  फौजी जवानो पर  पत्थर बरसाते नजर आते हैं , कितने फौजी को  भीड़ द्वारा मारा पीटा जाता है  कितने अपंग हो गए  कितनो ने दम  तोड़ दिया  और हमारे लीडरों  हमारे नेताओं का  हुक्म बयान होता  है कि  भले ही तुम्हारे साथ कुछ भी हो  लेकिन  तुमने जवाबी करवाई मत करना  ऐसा सरफिरा हुक्म होता है।   क्या किसी नेता लीडर  के बच्चे  सुरक्षा बालों में सेना में हैं  ?,   क्या किसी नेता के बच्चे  कभी  मेहनत  मजदूरी किये है  ? , क्या किसी नेता के बच्चे किसानी का काम किये है  ? ,  अगर देखा जाये तो पुरे देश में  किसी भी नेता लीडर के बच्चे  ऐसे किसी भी कार्य में नहीं मिलेंगे।   बात यही होती है की    ओ क्या जाने पीर  परायी  जिसके पैर न फटी बवाई।  
      अब भी वक्त है की देश के कर्णधारों  देश के जिम्मेदार नेताओ  सभी राजनितिक दलों को  चेतावनी है की समय रहते  व्यवस्था  सही करो , व्यवस्था  बदलो  वार्ना   वही हाल तुम्हारा हो सकता है  जो पकिस्तान के नेताओं का हो रहा है   देश माफ़ कर सकता है लेकिन  समय वक्त  तुम लोगों को माफ़ नहीं करेगा। 
   



Saturday, 2 June 2018

तीनों सेनाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं--रक्षामंत्री

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने लुधियाना के मीडिया से की वार्ता 
लुधियाना: 1 जून 2018: (प्रदीप शर्मा//FIB मीडिया):: 
सरकार की तरफ से सेना की तरफ ध्यान न दिए जाने के विपक्षी आरोपों की आज यहाँ रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने एक ही ब्यान से धज्जियां उड़ा दीं।  पत्रकारवार्ता में उन्हने स्पष्ट कहा कि देश की तीनों सेनाओं के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। वह यहाँ के महाराजा रीजेंसी में हुए एक विशेष आयोजन में मीडिया से बात कर रहीं थीं। मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों को तथ्यों सहित बताने के लिए पहली बार लुधियाना पहुंची सीतारमण ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने पहली बार तीनों सेनाओं के वाइस चीफ को हथियारों की खरीद के अधिकार दे दिए हैं। इससे सेना के हाथ मज़बूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं को फंड मुहैया करवाया गया है और वह अपनी जरूरतों के अनुसार हथियारों की खरीद कर रहे हैं। हथियारों के मामले में भी मज़बूत बनने की यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

Sunday, 27 May 2018

न्याय के लिए दरदर भटकते लोग ? जाएँ तो जाये कहाँ।


कौन है जिम्मेदार , कार्यपालिका , विधायिका या खुद न्यायपालिका ?
F.I.B. : - Media Information Service

इस महत्व पूर्ण लेख पर हर सच्चे भारतीय नागरिकों को गंभीरता के साथ विचार कर पुरे देश में जनजागृति  लाना ही समय की मांग है, देर  हानिकारक होगा । 
मानव अधिकार सुरक्षा परिषद् ( H.R.P.C.)द्वारा प्राप्त सुचना के मुताबिक हर रोज अदालतों में करीब 14 करोड़ लोग पेशी के लिए घरो से निकलते हैं / सुबह से शाम तक अदालतों में  भ्रष्टाचार और धक्के सहते हैं / कभी वकीलों के पीछे तारीख पूछना, कभी उनके मुंशियो के पास डाक्यूमेंट्स के लिए परेशान होना, कभी नक़ल, सम्मन के नाम पर कर्मचारियों को रिश्वत के नाम पर भ्रष्टाचार सहना यह रोजाना के हालात हैं / यहाँ तक कि जज साहिब द्वारा भी आम जनता को बहुत बार  डांट फटकार सहनी पड़ती है / अगर अदालतों में एक आदमी का खर्चा करीब 100 रूपये भी लगाया जाये तो इसका हिसाब 1400 करोड़ रूपये प्रतिदिन बैठता है / यह 1400 करोड़ रूपये देश का नुक्सान है / इसमें रिश्वत, अवकाश, जजों और कर्मचारियों की सैलरी को जोड़ा नही गया है /
अदालतों के लेट लतीफी और भ्रष्टाचार के चलते डर के मारे कई लोग तो अदालत का नाम सुनकर ही डर जाते हैं / इन्साफ समय से न मिलने के कारण देश भर में आतंकवाद, नक्सलवाद,जुर्म और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है / हमारा मानना है इन्ही सब कारणों से लोग अदालतों में जाने से ज्यादा रिश्वत देकर या गुंडों से अपना काम करवाना  ज्यादा बेहतर समझते हैं /
हिंदुस्तान में 90 प्रतिशत जनता को यह भी नही पता कि वो खुद अपने केस की पैरवी कर सकते हैं / अपने केस की पैरवी के लिए उन्हें वकील की जरूरत भी नही है / अफ़सोस है कि जो लोग अपना केस खुद लड़ते हैं उनको जजों द्वारा उलझाया और डराया जाता है / जिससे जनता का विश्वास धीरे धीरे अदालतों और जजों पर से उठता जा रहा है /
करीब हर पहले और तीसरे शनिवार को वकीलों द्वारा हड़ताल रहती है / जिसके कारण लोग तकलीफ सहते है और बिना इन्साफ के ही तारीख लेकर घर चले जाते हैं / इसका जिम्मेदार कौन है ? जज साहिबान के अदालतों में बैठने के बावजूद वकील केसेस में हाजिर नही होते / जो कि सीधा सीधा अदालतों की अवमानना और आम जनता के साथ अन्याय है /
कुछ जज साहिबान द्वारा अदालतों के क्लास तीन और चार कर्मचारियों से भी अन्याय पूर्ण व्यवहार और अत्याचार किया जाता है / जिसके कारण कई कर्मचारियों ने ख़ुदकुशी भी कर ली / परन्तु जज साहिबान पर कोई ठोस कार्यवाही नही होती / जज साहिबान द्वारा क्लास चार के कर्मचारियों से अपने घरो में गैर कानूनी तरीके से प्राइवेट काम लिए जाते हैं जैसे बर्तन धोना, पोचा लगाना, कपडे धोना, कार धुलवाना, खाना बनवाना आदि / जो सीधा सीधा भ्रष्टाचार है / क्योंकि जनता के खून पसीने की कमाई सैलरी के रूप में उन कर्मचारियों को अदालत में काम करने के लिए दी जाती है / जज साहिबान के घरो में होम peon की सुविधा होने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्यवाही नही हुई है / उनसे नौकरी से निकालने, ACR ख़राब करने और नोटिस देने की धमकियाँ देकर ऐसे घरेलू काम लिए जाते है / 
भाई भतीजावाद से भी अदालते पीछे नही हैं / अदालतों में जजों और कर्मचारियों में भाई भतीजावाद में भर्तियाँ की भरमार हैं /अगर स्वतंत्र जांच करवाई जाये तो दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जायेगा / न जाने कितने जज साहिबान के बच्चे, भाई भतीजे रिश्तेदार आपस में अदालतों में जज के रूप में काम करते हैं / दूसरी तरफ अदालतों में कार्य कर रहे जज साहिबान के बच्चे और रिश्तेदार भी वकीलों के रूप में अदालत में कार्य करते हैं / जिसे आप अंकल जज सिंड्रोम के नाम से भी जानते हैं / सब कुछ जानते हुए भी सब खामोश हैं /
हमारा मानना है कि जब निचली अदालतों के फैसलों को ऊँची अदालतों द्वारा पलटा जाता है तो फैसला करने वाले जजों का नार्को टेस्ट करवाया जाना चाहिए / देश भर की अदालतों में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है यह बात किसी से छुपी नही है /
         जैसे :-पंजाब में जजों की भर्ती में पेपर लीक करके करोड़ो रूपये के वारे न्यारे करने के केस सामने आये / जैसे रवि सिधु काण्ड, और अभी अभी पंजाब और हरयाणा हाई कोर्ट के जज बलविंदर शर्मा (रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट) पेपर लीक काण्ड / मधु कौड़ा रिश्स्वत काण्ड में करीब अरबो रूपये का भ्रष्टाचार हुआ लेकिन सजा सिर्फ 3 साल / केस निपटने में कई साल लगे / दूसरी तरफ एक मामूली छीना झपटी के केस में सजा अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है / हर बार गरीब को ही सजा ज्यादा भुगतता है /यह कानूनी भेदभाव क्यों ? 
             लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले केस में बरामदगी बहुत मामूली दिखाई गयी / और अब भारी जुर्माने किये जा रहे हैं / इन केस में सरकार के और पार्टी के खर्चे का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है / जज हेमंत गोपाल रिश्वत आरोप, निर्मल यादव जज का केस, जस्टिस हेमंत गुप्ता के परिवार पर आरोप और 1029 वकीलों द्वारा जस्टिस हेमंत गुप्ता की impeachment के लिए एप्लीकेशन देना अदालती भ्रष्टाचार को दिखाते हैं /
          बोफोर्स तोप घोटाले में करीब 62 करोड़ के घपले का आरोप था जिसमे सीबीआई  ने एक RTI के जवाब में माना है के करीब 525 करोड़ रूपये तो केस के ऊपर खर्च हो चुका है / और अभी सजा किसी को नही हुई / नतीजा जीरो है / जिसके कारण खरबों रूपये का राजनितिक और आर्थिक नुकसान देश को हुआ /
         अभिनेता सलमान खान के एक्सीडेंट केस में निचली अदालतों द्वारा   जरूरत से ज्यादा देरी दिखाते हुए उसका फैसला 13 साल बाद आता है / और इस दौरान महत्वपूर्ण गवाहों की रहस्यमय मौत पर अदालत ने संज्ञान नही लिया / और जब फैसला आया तो हाई कोर्ट द्वारा जमानत देने में नियमो को ताक पर रख कर जरूरत से ज्यादा तेजी दिखाई गयी / बिना जजमेंट के कॉपी के उसे कुछ घंटो में जमानत मिल जाना अदालतों के काम पर सवालिया निशान है / 
        पांच लोगो के गैर इरादातन हत्या के मामले में बरी होना और एक हिरन के मारने पर पहले पांच साल और फिर तीन साल की सजा होना साबित करता है कि इंसान की जान और इंसानियत की कीमत कितनी कम है /
         जय ललिता केस में भी देश की सबसे बड़ी बरामदगी हुई / निचली अदालत  द्वारा सजा होना और फिर हाई कोर्ट द्वारा बरी होना / और बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा साथी को सजा होना समझ से बाहर होता है कि किस जज ने फैंसला सही किया किसने गलत ? किसी भी जज की जवाबदेही तय नही की गयी / जो सीधा सीधा जजों के काम करने के तरीके पर सवालिया निशान है ?
           आज भी अदालत को इन्साफ का मंदिर कहा जाता है परन्तु अक्सर देश के सबसे बड़ी अदालत मानयोग सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस और हाई कोर्ट और निचली अदालतों के जज  साहिबान पर भ्रष्टाचार के आरोप देश की जनता के मन में जजों की ईमानदारी पर सवाल पैदा करते हैं / जिसके सबूत श्री प्रशांत भूषण वकील साहिब द्वारा दिए गये हैं /
           मौजूदा हालातों में देखा गया है कि देश के जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप के बारे में पूछने पर बड़े और नामी वकीलों जैसे श्री प्रशांत भूषण आदि वकीलों को न केवल अपमानित किया जाता है बल्कि उन पर भारी जुरमाना लगाकर डराया भी गया / ताकि भविष्य में जजों के भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई आवाज न उठा सके / जो आवाज उठाते हैं उनपर contempt ऑफ़ कोर्ट के केस लगा दिए जाते हैं / यहाँ तक कि अदालत के कर्मचारी हरमीत सिंह पर भी अदालतों के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर contempt ऑफ़ कोर्ट का केस चल रहा है / जस्टिस कर्णन, जज राजेंदर कुमार श्रीवास, वकील और आम जनता आज contempt ऑफ़ कोर्ट के केस के डर के कारण अदालती भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज नही उठाते /

सुधार :-
          अदालत में सुनवाई के दौरान ऑडियो विडियो रिकॉर्डिंग शुरू की जाये जिससे अदालतों में फैली कमियों और हर तरह के अदालती भ्रष्टाचार को तक़रीबन 70% तक कम किया जा सकता है /
जो लोग बिना वकील के अदालतों में खुद (in person) अपना केस लड़ते हैं उनको प्रोत्साहित किया जाना चाहिए / अक्सर देखा गया है कि जब कोई अपना केस खुद लड़ता है तो उसे कुछ  जज और वकील साहिबान द्वारा डराया धमकाया जाता है /
           अदालतों में लागू CrPC, CPC, IPC अंग्रेजो द्वारा 1860 में लागू की गयी थी / वर्तमान परिस्तिथियों के अनुसार इनमे बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव और सुधार किया जाना चाहिए / समयानुसार कानूनों में बदलाव भी होने चाहिए /
         जजों और वकीलों की जवाबदेही तय होनी चाहिए / ताकि भ्रष्टाचार पर रोक लगायी जा सके / इस काम में इमानदार वकीलों और जज साहिबान को आगे आना चाहिए / वकीलों द्वारा ली जाने वाली फीस की रसीद भी मुवक्किलों को देने का प्रावधान होना चाहिए /
         न्यायिक केसो में एक समय सीमा निर्धारित करनी चाहिए / देरी होने पर देरी का स्पष्ट कारण  दिया जाना चाहिए / ताकि लोगो का ख़त्म होता विश्वास अदालतों पर बना रहे / तारीख पर तारीख सिस्टम में कानूनी बदलाव होने चाहिए /
         ह्यूमन राइट्स की रक्षा जमीनी स्तर पर होनी चाहिए / मानवाधिकार का व्यापार बंद होना चाहिए / ह्यूमन राइट्स कमीशन में राजनितिक और नाकारा व्यक्तियों की नियुक्ति बंद की जाये /
        जात पात और धर्म की जगह प्रेम और भाईचारे के दंगे होने चाहिए / ताकि लोग प्यार से एक दुसरे के साथ रह सके /
        हर सरकारी विभाग में पब्लिक द्वारा मोबाइल रिकॉर्डिंग को कानूनी मान्यता दी जाये / सरकारी कर्मचारी को भी अधिकार दिया जाये कि वो भी क्रॉस रिकॉर्डिंग करे ताकि कोई मतभेद या एडिटिंग की सम्भावना खत्म हो जाये / मौखित आदेश की बजाय लिखित या मोबाइल रिकॉर्डिंग आदेश जारी किये जाये /
पुरुष आयोग की स्थापना की जाये /
अदालत में केस झूठा साबित होने पर जांचकर्ता पुलिस, शिकायतकर्ता और झूठी गवाही देने वालो पर सख्त कार्यवाही का प्रावधान किया जाये /
मानयोग सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस श्री टी एस ठाकुर ने बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष को आदेश दिया था कि जून 2017 तक सभी वकीलों की डिग्रीयों की जाँच करके रिपोर्ट दी जाये / उस आदेश की अतिशीघ्र जांच शुरू करवाई जाये और जिन वकीलों और जज साहिबान की डिग्री जाली पाई जाती है उनपर कार्यवाही की जाये /
         ग्राम न्यायालयों की स्थापना मोहल्ला और पंचायत स्तर पर की जाये ताकि न्याय हर व्यक्ति तक आसानी से पहुँच जाये / और सस्ता न्याय सभी को समान रूप से मिल सके /
जजों की नियुक्ति पर्याप्त मात्रा में की जाये /
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) अपना मूलभूत काम करें / अन्यथा (NALSA) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बंद किया जाये ताकि आम जनता के लाखो करोड़ो रूपये की बर्बाद न हों ? राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के संरक्षकों (Patron-in-chiefs)  को पीड़ितों से सीधा मिलने का प्रबंध करें / 
          F.I.B. + फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो देश के  आम नागरिकों के ध्यान में यह लाना चाहती है की  कुछ राजनितिक स्वार्थ , कुछ धनाढ्य फायदे हेतु , कुछ  देश की जनता के नाम पर  लगभग सौ बार  संविधान का संसोधन किया जा चूका है  तो क्या इस संसोधन का फायदा देश के नागरिकों को हुआ भी है ?  इसपर भी  देश के पढ़ेलिखे  संभ्रांत लोगों को भी  आवाज उठाना राष्ट्र हित में ही होगा। 

HUMAN RIGHTS PROTECTION COUNCIL
FORUM FOR FAST JUSTICE, LUDHIANA
JUDGE ADVOCATE PIDIT ORGANISATION
DARK SIDE OF INDIAN JUDICIARY

Wednesday, 23 May 2018

बड़े पैमाने पर आतंक के ट्रेलर की सच्ची कहानी तो नहीं ?

अति संवेदनशील क्षेत्र  सरायमीर क़स्बा तबाह होने से बचा कैसे ?। 
मीडिया इंटेलिजेंस की खास रिपोर्ट  
F.I.B. Media  Service : Bablu Yadav ,  Akhilesh jaiswal  
आजमगढ़  पहले से ही आतंकवादगढ़ के नाम से बदनाम , उपर से यहाँ के कुछ लोग बंदरी सेना ( 15 साल से लेकर 20 - 22  साल के युवाओं को ) आगेकर सीधे पुलिस प्रशासन से टक्कर लेना,  सरायमीर थाने  पर हमला पथराव , पुलिस चौकी पर हमला तोड़फोड़ कर आग लगाना और दंगा फ़ैलाने की कोशिश ? हिन्दू नेता पर प्राणघातक हमला , यह सब क्या दर्शाता है ? कौनसी देशी विदेशी शक्तियों के इशारे पर यह सब हुआ  है और हुआ , कौन है परदे के पीछे  राष्ट्र हित में पर्दाफ़ाश करना जरुरी। ( यह भी सत्य है की कसबे के अधिकांश लोग हिन्दू मुस्लिम  साथ मिलकर व्यापार दुकानदारी भी करते हैं लेकिन  इन सबको  दूर करने वाले , इंसानियत के दुश्मन कौन हैं  )
                    गुमराह मुस्लिम  दहशत गरदियों के पीछे कौन सी ताकतें ?
                    थाने में SDM, C.O, SO, फ़ोर्स के रहते हमला ?
                   पुलिस थाने पर हमला तोड़फोड़  पथराव ? 
पुलिस चौकी पर तोड़फोड़ आगजनी ,? 
संभ्रांत हिन्दू नेता पर जानलेवा हमला?
दो चार पहिया  वाहनों पर पथराव?
देश समाज विरोधी भड़काऊं नारेबाजी ? 
इनसबके पीछे किसकी शाजिसे ?
हिन्दू मुस्लिम साम्प्रदाईक दंगा भड़काने का प्रयास  
किस मुल्क के दिशानिर्देश शह पर यह सब हुआ रिहर्शल। 
इसकी गोपनीय जांचकर  सार्वजानिक करना जरुरी है , क्योंकि  यह क़स्बा कई बार विवादों के घेरे में पड़ चूका है।  भविष्य में ऐसी खुरापात न हो यहाँ के लोग  सुख शांति चैन से रहे।  हर समाज में कुछ गंदे विचारधारा के लोग होते हैं ? पर सरायमीर के आलावा पुरे देश में  क्यों मुस्लिम समाज पर ही क्यों उँगलियाँ उठती है  क्या  मुस्लिम समाज के अग्गरणीय  नेता , धार्मिक गुरु , पढ़े लिखे संभ्रांत  बुद्धजीवी  लोग इसपर  गहराई से विचार किये  ? , इसपर  समाज के  बुद्धजीवियों  धार्मिक गुरुओं  को  कोई न कोई सार्थक रास्ता निकलना  पुरे देश के हर समुदाय के लिए हितकर रहेगा।  हम सभी  हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ईसाई , बौद्ध , जैन   सबके सब एक खून एक देश के निवासी हैं , खली पंथ  अलग  हैं। 

        इतिहास गवाह है जब जब भी बड़े से बड़ा भयानक दंगे फसाद , खून खराबा  युद्ध तबाही हुयी है उसकी शरुआत छोटे से गड़बड़ी  कारण की वजह से हुयी है. लेकिन  यह तो एक संयोजत तरीके से हुआ  बहाना भले ही पैगम्बर साहिब के खिलाफ टिपण्णी से जोड़ा जा रहा है ( यहाँ यह भी सत्य है क़ि  किसी के  भी धर्म के खिलाफ किसी दूसरे को गलत शब्द बोलना निंदनीय है   ऐसे समय में धार्मिक भावनाओं पर आक्रोश गुस्सा  होना स्वाभाविक  है ) लेकिन प्रशासन द्वारा  जब इस नामके लड़के द्वारा अभद्र टिप्पड़ी करने पर  पुलिस ने कानूनन बनती करवाई कर उसको जेल में दाल दिया तो सान्ति के साथ मिल बैठकर निपटना हितकर होता।     

  यह मामला दो तीन दिन पहले उस वक्त शुरू हुआ जब एक अस्थानीय अमित शाह नामक युवक ने फेस बुक पर मोहम्मद साहेब पर टिपण्णी कर दी जिससे इस समुदाय के लोग भड़क गए।  पूर्व नगर अध्यक्ष  ओबैदुर रहमान की शिकायत पर पुलिस थाने में भारतीय दंड सहिंता की धारा  प्रोद्यौगिकी धारा 66 A, 295  के तहत मुक़दमा दर्ज कर अमित शाह को अरेस्ट कर जेल भेज दिया। लेकिन ? बात और अपनी ?  ओबैदुर रहमान की शाह पर और लोगों के  कामिल जमाइल कोरौलीखुर्द  ने पुलिस को रासुका लगाने की मांग पुलिस अधिकारीयों ने कहा की हमने कानूनन बनती करवाई कर दोषी को जेल भेज दिया है। शरारती उपद्रवकरता  एक सुन्योजित तरीके  से  26    27  अप्रैल को तोड़फोड़ पथरबाज़ी , हल्ला बोल  हमला  आगजनी कर इलाके के संभ्रांत हिन्दू नेता पर कातिलाना हमला कर  दंगा भड़काने की कोशिश। बाद में पुलिस ने निसार अहमद , सर्किल सदबाज़ ,आदिम हनीफ  व पूर्व नगर अध्यक्ष  ओबैदुर रेहमान सहित  दर्जनों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल में दाल चुकी है  कामिल जमाइल  सहित लगभग 2  दर्ज़न  के लगभग  फरार हैं , पुलिस इन्हे भी बिरफ्तार करने में लगी है। 
 कुदरती बात की इन घटना के दूसरे दिन ही  राष्ट्रिय अपराध विरोधी गुप्तचर मीडिया के  डायरेक्टर मैनेजिंग एडीटर डॉ. भारत   जिनका संबंध कार्य  देश की आंतरिक सुरक्षा से भी जुड़ा है  .   सरायमीर आगये थे  ने दूसरे दिन नगर अध्यक्ष  रामप्रकाश यादव के साथ थाना सरायमीर के थानाध्यक्ष      ( इंचार्ज ) रामनरेश यादव के साथ थाने  में मुलाकात कर  पूरी जानकारी ली.       यहाँ पर थानाध्यक्ष  ने बताया की  हमारे पास पर्याप्त फाॅर्स के साथ स्वचालित हथियार  और  AK 47     AK 56    303  SLR  आधुनिक हथियार थे  पथराव  से  SDM, C.O,   कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे।  थानाध्यक्ष ने पूरी जानकारी देते हुए आगे बताया कि  हमने मानवता का परिचय देते हुए गोली चलने का आदेश तक नहीं दिया , क्यों की गोली चलती तो न जाने कितने लोग मौत के मुँह में चले जाते और इस कसबे का क्या हाल होता खुद अंदाजा लगा सकते हैं, जिसके लिए अस्थानीय थानाध्यक्ष  रामनरेश यादव  की सूझबूझ की तारीफ  करना जरुरी है।   
          बादमे  पांच मई को सरायमीर थाने (पुलिस स्टेशन  ) में पीस कमेटी शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए हिन्दू मुस्लिम की विशेष बैठक का आयोजन किया गया जिसमे अस्थानीय हिन्दू मुस्लिम सभी लोग शामिल हुए। साथ ही नव नियुक्त  जिला पुलिस कप्तान ( SSP)  व अन्य अधिकारी भी शामिल होकर  अपने अपने विचार व्यक्त किये , मुख्यता जोर इसी बात का था की यहाँ के लोग मिलजुल कर रहे और यहाँ पर   शांति व्यवस्थ कायम रहे।  

Saturday, 19 May 2018

पंजाब में नशे रुपी जहर को मिलजुल कर रोका जा सकता है।

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ़ विशेष बैठक हुयी । 
 F.I.B.:- Media Inteligence Service  
 
 जबतक समाज के अग्रणीय व सामाजिक संगठन खुलकर पुलिस प्रशासन का सहयोग नहीं करतीं तबतक समाज में फैली नशे रूपी कोढ़ कैंसर जैसी तबाही वाली वस्तुओं और अन्य बुराई को नहीं ख़त्म किया जा सकता  अकेले पुलिस के बस की बात नहीं जो समाज में फैली इन बुराइयों को ख़त्म  कर सके।  
        लुधियाना  :  18 मई > फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो  न्यूज़ :>  वही देश समाज तरक्की कर आगे बढ़ कर शक्तिशाली हो सकता है जिस देश के नागरिक अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए  असामाजिक तत्वों और बुराइयों के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होकर मुकाबला कर जड़ से उखाड फेकने में सक्षम हों।  यह जाहिर  हो चूका है की कुछ तथाकथित राजनीतिक और कुछ भ्र्ष्ट नौकरशाहियों की वजह से हर तरह के अपराध जहाँ बढ़ते जा रहे हैं वहीँ कैंसर कोढ़ रूपी नशीले वस्तुवें  चिट्टा , ब्राउनशुगर , सिन्थेटिक , हैरोइन जैसी घातक ड्रग्स ने समाज को विकृति और खोखला कर दिया है। 
       इन्ही सब बातों को लेकर  राष्ट्र हित में काम करने वाला  गुप्तचर मीडिया संगठन  (  F.I.B. फर्स्ट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो ) के मुख्य कार्यालय   जो लुधियाना के सिविल लाइन्स क्षेत्र में है के कार्यालय में  पंजाब मार्केटिंग मुलाजिम जत्थेबंदी के अकाउंटेंट सुपरिंटेंडेंट सुरजीत सिंह जोहल ( जालंधर ) पंजाब एलेक्ट्रसिटी बोर्ड़ रोपड़ से जूनियर इंजीनियर दर्शन सिंह , पंजाब  सरकार सेवा  के पूर्व अधिकारी  हरजीत सिंह मरिंडा रोपड़ ,   आनंदपुर साहिब से पंजाब बिजली बोर्ड के रि. अधिकारी दर्शन सिंह  व बलजिंदर सिंह संधू  ने ब्यूरो के डायरेक्टर = अध्यक्ष  डॉ.  भारत से विशेष मुलाक़ात  कर  जहाँ देश समाज में ब्याप्त बुराइयों को रोकने और संगठन द्वारा राष्ट्र हित में किये जारहे कार्यों को सहयोग करने का बचनबद्ध हुए।